Kanpur: New twist in stenographer suicide case

सांकेतिक तस्वीर
– फोटो : अमर उजाला

स्टेनोग्राफर खुदकुशी मामले में मृतका के पिता की ओर से न्यायिक अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज किए जाने संबंधी रिवीजन याचिका को जिला जज ने स्वीकार कर लिया है। विपक्षियों को नोटिस जारी कर 30 नवंबर को जवाब दाखिल करने को कहा है।


सिविल जज सीनियर डिवीजन की कोर्ट में स्टेनोग्राफर के पद पर कार्यरत रहीं नेहा परोची ने 18 अक्तूबर 2025 को न्यायालय भवन की छठवीं मंजिल से कूदकर खुदकुशी कर ली थी। इसमें एक साल से पुलिस की विवेचना पूरी नहीं हो सकी है वहीं स्टेनोग्राफर के पिता ने दूसरी एफआईआर दर्ज कराने के लिए कोर्ट का सहारा लिया है।

पिता ने तत्कालीन सिविल जज सीनियर डिवीजन अमर प्रताप चौधरी, पेशकार राकेश कुमार कमल व चपरासी विपिन कुमार दीक्षित पर मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित करते हुए रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए सीजेएम कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया था। इसे कोर्ट ने 30 जुलाई को खारिज कर दिया था। इसी आदेश के खिलाफ गोविंद ने जिला जज की अदालत में रिवीजन याचिका दाखिल की थी। गोविंद के अधिवक्ता विजय बख्शी ने तर्क रखा है कि पीड़ित पिता हैं, उन्हें वादी बनाना चाहिए जबकि जिस पेशकार पर आरोप है उसी को वादी बनाकर जांच की जा रही है। गोविंद की तहरीर पर दूसरी रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश देने की मांग की गई थी, जिसे सीजेएम ने खारिज कर दिया। याचिका की पोषणीयता के आधार पर सुनवाई के बाद जिला जज ने इसे स्वीकार कर लिया है और तीनों विपक्षियों को जवाब दाखिल करने के लिए नोटिस जारी किया है।



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