Mathura resident Neelam Sirohi won silver medal at World Wrestling Championships held in Kazakhstan

पिता कुंवरपाल और पहलवान नीलम सिरोही।
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

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लगभग दस साल पहले 16 वर्षीय एक किशोरी के पिता ने कुटुंब के लोगों को बुलाकर कहा कि उनकी बेटी अब पहलवानी की राह पर चल रही है। वह कुश्ती में देश का नाम रोशन करना चाहती है। आशीर्वाद दीजिए। इस पर एक बुजुर्ग उठ खड़े हुए। कंधे पर अपनी चादर रखकर बोले कि यह खेल छोरियों का नहीं है। ज्यादा चक्कर में ना पड़।


बुजुर्गवार तो यह कहकर चले गए पर ये शब्द उस छोटी पहलवान के दिमाग में हथौड़े की तरह बजते रहे। तब तक… जब तक कि उसने जीत की राह पर कदम नहीं रख दिए। पिता ने भी जिद जिद ठानी कि अब नहीं किसी ने पूछना है और इस बेटी ने पूरे देश का नाम रोशन कर दिया। बात कर रहे हैं कजाकिस्तान में हुई विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में रजत पदक जीतने वाली नीलम सिरोही की। मथुरा के गांव फैंचरी की रहने वाली नीलम ने सोमवार को अमर उजाला कार्यालय पहुंचकर अपने अनुभव साझा किए।

 



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