जिपलाइन हादसे की जांच रिपोर्ट ने संचालनकर्ता कंपनी की अमानवीयता और रोंगटे खड़े करने वाली लापरवाही खोलकर रख दी है। हालांकि कंपनी की घोर लापरवाही के साक्ष्य मिलने और एक मासूम की जान जाने के बावजूद संबंधित कंपनी के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इससे अफसरों पर एडवेंचर पार्क का संचालन करने वाली कंपनी के साथ सांठगांठ करने और उसे बचाने के गंभीर आरोप लग रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार जांच समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि 24 मई को हुए हादसे के वक्त बड़े टॉवर पर तैनात मैसर्स विजन एम्युजमेंट पार्क प्राइवेट लिमिटेड के कर्मचारी ने सेफ्टी किट का हुक स्लाइडिंग रोप से ठीक से बांधा ही नहीं था। रही-सही कसर नीचे बंधी टाइट जाली ने पूरी कर दी जो इतनी कसी हुई थी कि उस पर गिरकर बालक सुरक्षा कवच मिलने के बजाय उछलकर सीधे पत्थरों वाली जमीन पर जा गिरा।

संवेदनहीनता की हद तो तब पार हो गई जब हादसे के तुरंत बाद भी कंपनी के कर्मचारियों ने जिप राइडिंग का संचालन बंद नहीं किया और लहूलुहान बच्चे के सामने ही अन्य पर्यटकों को राइड कराते रहे। अनुबंध की शर्तों के अनुसार मौके पर मेडिकल इमरजेंसी के लिए फर्स्ट-एड बॉक्स और सपोर्ट देना अनिवार्य था लेकिन तड़पते बच्चे को प्राथमिक उपचार तक नसीब नहीं हुआ।

आरएफपी के नियमों के मुताबिक परिसर में पर्यटकों की सुरक्षा की शत-प्रतिशत जिम्मेदारी इसी चयनित कंपनी की थी। इसके बावजूद एडीए के जिम्मेदार अधिकारी अब तक कंपनी के जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं कर सके हैं। मुख्य अभियंता संजीव कुमार का कहना है कि जांच में लापरवाही मिली है और फाइनल रिपोर्ट उपाध्यक्ष को भेजी जाएगी। उनके निर्देश पर आगे कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा।

कुनाल के परिजन को मिला 10 लाख का चेक

चौपाटी में जिप लाइन हादसे में जान गंवाने वाले कुनाल के परिजन को 10 लाख की राहत राशि दी गई है। आगरा विकास प्राधिकरण के अधिकारियों ने फिरोजाबाद जाकर कुनाल के पिता पंकज अग्रवाल को चेक सौंपा है।

 



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