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मेरठ में जुबैर के मुठभेड़ में मारे जाने के बाद उसकी बहन मुबश्शिरा अन्य परिजन के साथ मेरठ मेडिकल कॉलेज के पोस्टमार्टम हाउस पहुंची। मुबश्शिरा भाई जुबैर की मौत से आहत थी लेकिन उसने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि उसका एक शेर चला गया, दो जिंदा हैं। देखना अभी कितने जनाजे उठेंगे। इसके बाद उसके परिजन जुबैर का शव लेकर लौट गए। मुनीर के ‘द किलिंग मशीन ए गैंग’ की कमान जुबैर संभाल रहा था।
एसटीएफ के एएसपी बृजेश कुमार सिंह ने बताया कि जुबैर पहले मुनीर गैंग का शॉर्प शूटर था। वह गिरोह के लिए वारदात को अंजाम देता था। बिजनौर के स्योहारा कस्बे के सहसपुर से 12वीं में फेल होने के बाद वर्ष 2009 में एएमयू में दाखिला लेने के लिए मुनीर पहुंचा था।
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मुठभेड़ स्थल पर पड़ी पिस्टल और बाइक
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मुनीर ने यहां पढ़ाई के स्थान पर अपराध का रास्ता पकड़ लिया। यासिर-फहद की मदद से पिस्टल खरीदकर उसने सोशल मीडिया पर ‘द किलिंग मशीन ए गैंग’ नाम से गिरोह का संचालन कर एक के बाद एक कई वारदात की गई।
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जुबैर का फाइल फोटो
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मुनीर के गिरोह में अलीगढ़ के जुबैर के अलावा फर्रुखाबाद का आशुतोष मिश्रा, अंबेडकर नगर टांडा का सऊद, बिहार का अतीउल्लाह, आजमगढ़ का शादाब आदि शामिल थे। इस गिरोह ने ही एनआईए के डीएसपी तंजील अहमद दंपती की हत्या की थी।
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मुठभेड़ स्थल
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बताया गया है कि डीएसपी तंजील पाकिस्तानी घुसपैठ मामले की जांच कर रहे थे। उस दौरान मुनीर की गिरफ्तारी हुई थी। तंजील अहमद और उनकी पत्नी की हत्या का दोषी करार देते हुए मुनीर और उसके साथी रयान को 21 मई 2022 को बिजनौर के एडीजे कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई थी।
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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
21 नवंबर 2022 को बीएचयू में उसकी मौत हो गई थी। उसे यहां तबीयत बिगड़ने पर भर्ती कराया गया था। इसके बाद से इस गिरोह की कमान जुबैर संभाल रहा था। उसके दो भाई भी इस गिरोह में शामिल हैं। उन्हें भी पुलिस तलाश रही है। उसकी बहन इन्हीं दोनों भाइयों के लिए कहा है कि वह अभी जिंदा हैं।