आगरा के सदर सहित जिले की सभी तहसीलों में ई-रजिस्ट्रेशन और फ्रंट ऑफिस व्यवस्था के विरोध में चल रही अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों और स्टांप वेंडर्स की हड़ताल बुधवार को 16वें दिन समाप्त हो गई। बृहस्पतिवार से बैनामा, विवाह पंजीकरण, नकल के साथ राजस्व मुकदमों में सुनवाई और पैरवी शुरू हो जाएगी।
महानिरीक्षक स्टांप नेहा शर्मा ने 4 जून को नई व्यवस्था का आदेश जारी किया था। इसका तहसील में कड़ा विरोध हो रहा था। 29 जून को इस आदेश का खंडन कर दिया गया, लेकिन हड़ताल जारी थी। बुधवार को एआईजी स्टांप योगेश कुमार और एसडीएम सचिन राजपूत ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों को आश्वस्त किया कि किसी भी तरह का निजीकरण नहीं किया जा रहा है। अधिकारियों के साथ वार्ता के बाद तहसील बार एसोसिएशन के अध्यक्ष शंभूनाथ वर्मा और महासचिव अरविंद कुमार दुबे के नेतृत्व में आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की गई। हालांकि, बुधवार को भी हड़ताल के कारण तहसील में निबंधन और न्यायिक कामकाज ठप रहा।
लीज डीड पर छूट खत्म होने से बढ़ी परेशानी, सीएम से मांगी स्थायी राहत
प्रदेश में लीज डीड (पट्टा विलेख) पर स्टांप शुल्क में मिली छह माह की अस्थायी छूट 18 जून को समाप्त हो गई है। महंगी दरें दोबारा लागू होने से लोग फिर से 11 महीने के अनौपचारिक एग्रीमेंट की ओर लौट रहे हैं। इसे लेकर अधिवक्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता केसी जैन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर स्टांप ड्यूटी में स्थायी रियायत देने की मांग की है। उन्होंने बताया कि यूपी में 1 से 5 वर्ष की लीज पर लगभग 12% और 5-10 वर्ष पर 16% तक स्टांप शुल्क लगता है। इसके विपरीत, महाराष्ट्र में मात्र 0.25% और दिल्ली में 2-3% ही शुल्क देय है। अत्यधिक स्टांप शुल्क के कारण लोग डीड का पंजीकरण कराने से बचते हैं। इससे राज्य सरकार को न सिर्फ स्टांप शुल्क व जीएसटी के रूप में राजस्व का नुकसान हो रहा है, बल्कि किरायेदारी से जुड़े कानूनी विवाद आदि बढ़ने की भी आशंका है।