झपकी आना नींद से पहले होने वाली सामान्य प्रक्रिया है। सामान्यत: मनुष्यों के लिए यह नींद आने का संकेत है। सोमवार की रात के समय लिक्विड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) कैप्सूल लेकर मैनपुरी-दन्नाहार मार्ग से जा रहे चालक ने नींद के इस इशारे की अनदेखी की। उसने वाहन नहीं रोका। वह नींद की झपकी में चलता रहा , नतीजा 18 टन गैस ले जा रहे कैप्सूल (टैंकर) पलटकर खाई में जा गिरा। गैस रिसाव शुरू हो गया। जैसे-जैसे सूचना फैली। आसपास के गांवों में दहशत का माहौल बन गया पूरे 38 घंटे तक कायम रहा। इस दौरान दो हजार लोगों की नींद उड़ी रही। वहीं, इस मार्ग से गुजरने वाले लगभग 2000 वाहनों का रास्ता बदलना पड़ा। 10 पेट्रोल पंप और आठ स्कूल बंद रहे।

2 of 6
सड़क पर स्कूल बस खड़ी कर बंद किया रास्ता।
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
दरअसल, घटना सोमवार रात करीब 12:30 बजे की है। मथुरा रिफाइनरी से एलपीजी गैस लेकर नेपाल जा रहे टैंकर चालक को अचानक नींद की झपकी आ गई। परिणामस्वरूप दन्नाहार क्षेत्र के बटरौली गांव के पास टैंकर अनियंत्रित होकर सड़क किनारे स्थित खाई में पलट गया। गैस का रिसाव होने लगा। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और आनन-फानन में दन्नाहार और सिंधिया तिराहे से आवागमन पर रोक लगा दी गई। साथ ही आसपास के लोगों को आग जलाने से जैसी किसी भी छोटी-बड़ी गतिविधि से बचने का अलर्ट जारी किया गया। नतीजा घरों में अगले दिन चूल्हे नहीं जले। करीब आसपास के गांवों के दो हजार लोगों अगले 38 घंटे तक ठीक सो भी नहीं सके। बुधवार दोपहर करीब 2:30 बजे टैंकर को दो क्रेन की मदद से हटाया गया। इस बाद ही लोगों ने राहत की सांस ली।

3 of 6
एलपीजी टैंकर को हटाती क्रेन।
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
वाहनों को आवागमन ठप रहा, पेट्रोल पंप और स्कूल बंद रहे
मैनपुरी से आगरा जाने वाले मार्ग पर रोज करीब 1000 से 1200 वाहन निकलते हैं। 38 घंटे में करीब 2000 से ज्यादा वाहनों का आवागमन टैंकर पलटने से बंद रहा। वाहनों को सिंधिया तिराहे, ज्योंती तिराहे, पड़रिया चौराहे और कुरावली मार्ग से घिरोर होकर गुजारा गया। भारी वाहनों को घिरोर से डायवर्ट किया गया। इस कारण लोगों को करीब 7 से 8 किलोमीटर का लंबा चक्कर लगाना पड़ा। वहीं, इस दौरान आसपास के क्षेत्र में 10 पेट्रोल पंप और आठ स्कूल भी बंद रहे।

4 of 6
माैके पर तैनात दमकल की गाड़ी।
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
कैप्सूल के रेस्क्यू के दौरान फायर विभाग की टीम फायर ब्रिगेड वाहन और अग्निशमन यंत्रों के साथ मौके पर मौजूद रही। लिक्विड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) टैंकर लोगों के लिए 38 घंटे की लंबी मुसीबत बन गया। करीब 38 घंटे तक चली इस प्रक्रिया में 2000 से ज्यादा वाहनों को रास्ता बदलकर अपने गंतव्य की ओर जाना पड़ा।

5 of 6
हवा में गैस का प्रवाह चेक करते अधिकारी।
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
हवा में गैस का प्रवाह देखते रहे अधिकारी
इंडियन ऑयल फर्रुखाबाद के सेफ्टी मैनेजर प्रकाश सिंह लगातार रेस्क्यू पर नजर बनाए रहे। टैंकर से निकलती एलपीजी का हवा में कितना प्रवाह है, इसे देखते हुए वे लगातार मशीन से इसका प्रतिशत जांचते रहे। उन्होंने बताया कि जब कैप्सूल बाहर निकाला गया तो उसके नोजल में लगाया गया लकड़ी का टुकड़ा हटा दिया, जिससे उसमें बची गैस तेजी से बाहर निकलने लगी। मशीन में उसका प्रवाह करीब 18 प्रतिशत था।
