वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा ने बताया कि जिला जज का आदेश मिलने के बाद दोनों दोषियों के लिए जेल के नियम बदल जाएंगे। अब उन्हें सजायाफ्ता कैदी की तरह रहना होगा। फिलहाल जिला कारागार में कुल 1983 बंदी हैं। इनमें 378 सजायाफ्ता कैदी हैं। इनमें 16 सजायाफ्ता महिलाएं हैं। दो महिला बैरक हैं। ये एक ही बैरक के दो पार्ट हैं।
बैरक नंबर 12ए में विचारधीन बंदी रहती हैं और 12बी में सजायाफ्ता महिला बंदियों को रखा जाता है। साहिल फिलहाल 17 नंबर बैरक में रह रहा है। उसे 15 नंबर बैरक में शिफ्ट किया जाएगा। दोनों के मुलाकात के दिन भी एक माह में 12 से घटाकर चार कर दिए जाएंगे।
अब तक उनसे परिजन एक माह में 12 बार मुलाकात कर सकते थे। अब एक माह में दो बार मुलाकात और दो बार फोन पर बात या फिर चार बार मुलाकात कर सकेंगे। हालांकि मुस्कान से मिलने अब तक कोई परिजन नहीं पहुंचा है। साहिल से मिलने उसका भाई दिव्यांश और नानी पुष्पा देवी अक्सर जिला कारागार आते हैं।
जेल अधीक्षक का कहना है कि दोषी करार दिए जाने के बाद दोनों दोषियों ने खाना कम कर दिया है। वह अब लगभग आधा खाना खा रहे हैं। दोनों तनाव में हैं और चिंतित हैं। वे अन्य बंदियों से अब बात भी कम करते हैं।
जेल मैनुअल के तहत अभी मुस्कान के साथ रहेगी बच्ची
जिला अदालत द्वारा मुस्कान रस्तोगी को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद जेल में उसके साथ रह रही 10 महीने की मासूम बच्ची के भविष्य को लेकर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। इस बीच वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा ने स्पष्ट किया है कि बच्ची की स्थिति में तत्काल कोई बदलाव नहीं किया जा रहा है।
वरिष्ठ जेल अधीक्षक ने बताया कि जेल मैनुअल के नियमों के मुताबिक, कोई भी बच्चा छह साल की उम्र तक अपनी मां के साथ जेल में रह सकता है। मुस्कान की 10 महीने की बेटी फिलहाल उसके साथ ही रहेगी और जब उसकी फांसी की तारीख तय होगी, तब बच्ची के संबंध में अंतिम निर्णय लिया जाएगा। मुस्कान और साहिल को मेरठ जेल में ही रखा जाएगा या कहीं और स्थानांतरित (शिफ्ट) किया जाएगा, इस पर कोर्ट का विस्तृत आदेश मिलने के बाद फैसला होगा।




