राम मंदिर निर्माण में निर्माण समिति की भूमिका और निर्माण से जुड़े फैसलों को लेकर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय के नाम से सामने आए पत्र के बीच राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने कहा कि मंदिर निर्माण में निश्चित रूप से ट्रस्ट का योगदान है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंदिर और परिसर के निर्माण में केंद्र अथवा राज्य सरकार का एक पैसा भी नहीं लगा है। निर्माण के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद गठित ट्रस्ट की ओर से धन एकत्र किया गया और उसी धनराशि से कार्य कराया गया। उधर, पत्र को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच रामकथा संग्रहालय के निदेशक डॉक्टर संजीव सिंह का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि मीडिया में जिस दस्तावेज को पत्र बताकर प्रकाशित किया जा रहा है, वह वास्तव में पत्र नहीं है, बल्कि प्रकाशित और परिमार्जित हो रही पुस्तक के बिंदु हैं। निदेशक ने स्पष्ट किया कि ये बिंदु चंपत राय की प्रकाशित पुस्तक ‘जस का तस’ और आगामी पुस्तक से संबंधित हैं। उनके मुताबिक, इसे आलोचनात्मक पत्र के रूप में देखना उचित नहीं है।

चंपत राय के नाम से वायरल पत्र में मंदिर निर्माण से जुड़े फैसलों में नृपेंद्र मिश्र की भूमिका और उनके स्तर से अपनी पसंद के लोगों को समितियों में शामिल किए जाने समेत कई सवाल उठाए गए थे। नृपेंद्र मिश्र ने हालांकि पत्र पर सीधे टिप्पणी करने से दूरी बनाए रखी। सर्किट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि उन्होंने ऐसा कोई पत्र देखा ही नहीं है। इसे मनगढ़ंत गाथा बताते हुए उन्होंने कहा कि संभव है कि इस प्रकार का कोई पत्र या आलोचना की ही न गई हो। उनके मुताबिक, केवल विवाद पैदा करने की कोशिश की जा रही है।

उन्होंने ने मंदिर निर्माण को करोड़ों-करोड़ों श्रद्धालुओं के सपने का साकार होना बताया। कहा कि बीती पीढ़ी और आज की पीढ़ी ने कभी यह आशा नहीं की थी कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हो सकेगा। अब यह सपना पूरा हुआ है। उन्होंने कहा कि इस सपने को साकार करने में निश्चित रूप से ट्रस्ट का योगदान है। ट्रस्ट के अनेक सदस्य मंदिर आंदोलन में रहे हैं और सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद ट्रस्ट गठित होने पर उसकी ओर से ही निर्माण के लिए धन एकत्रित किया गया।

70 में से 60 कार्य पूरे, ट्रस्ट को हैंडओवर

निर्माण कार्यों की प्रगति की जानकारी देते हुए नृपेंद्र मिश्र ने बताया कि निर्माण के लिए जरूरी करीब 70 कार्यों में से 60 पूरे किए जा चुके हैं। इन कार्यों को ट्रस्ट को हैंडओवर भी कर दिया गया है। अब इनकी मेंटेनेंस की जिम्मेदारी ट्रस्ट की होगी। ट्रस्ट को सौंपे गए निर्माण कार्यों का आंतरिक ऑडिट भी कराया जाएगा।

जलभराव की समस्या, दो माह में ड्रेनेज का काम

उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर में बारिश के दौरान पानी एकत्र होने की समस्या पर मंडलायुक्त और नगर आयुक्त से भी चर्चा हुई। बारिश के पानी की निकासी बेहतर करने के लिए सीवेज और ड्रेनेज व्यवस्था को मुख्य नाले से जोड़ने की योजना पर काम होगा। मंडलायुक्त ने दो माह में सीवेज और ड्रेनेज का काम पूरा करने का आश्वासन दिया है।

संग्रहालय, ऑडिटोरियम और ट्रस्ट कार्यालय पर फोकस

अब रामकथा संग्रहालय, ऑडिटोरियम और ट्रस्ट कार्यालय के निर्माण कार्यों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। नृपेंद्र मिश्र के अनुसार इन कार्यों में करीब चार माह का काम बाकी है। संग्रहालय की गैलरी नंबर सात के निर्माण में करीब पांच करोड़ रुपये खर्च होने हैं। गैलरी के संचालन के लिए टिकट लगाया जाए या इसे निशुल्क रखा जाए, इसका निर्णय अब ट्रस्ट को करना है। संग्रहालय की तैयार स्क्रिप्ट के अनुसार प्रवर्तन संस्था थ्री-डी तकनीक के माध्यम से प्रस्तुति दिखाना चाहती है। संस्था की ओर से इसका प्रजेंटेशन भी दिया गया है।



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