इंतजार करती पत्नी, मां के संघर्ष और प्रेमिका के भावनात्मक संसार को जूही ने अपने अभिनय के जरिए प्रभावी रूप से सामने रखा। नाटक में कभी प्रेम के खूबसूरत लम्हे दिखाई दिए तो कभी जुदाई का दर्द। कई प्रसंगों ने दर्शकों को भावुक किया तो हंसी-खुशी और गुदगुदाते दृश्यों ने माहौल को हल्का भी बनाया।
नाटक का लेखन नादिरा जहीर बब्बर, नूर जहीर और जूही बब्बर सोनी ने किया है। निर्देशन मकरंद देशपांडे और जूही बब्बर सोनी ने किया। प्रस्तुति के अंत तक दर्शक कहानी से जुड़े रहे। इस अवसर पर जूही बब्बर सोनी की टीम सदस्य, रवि मिश्रा, अचित मारवा, दिया भंसाली, निलेश, रिसा गुप्ता आदि उपस्थित रहे।
नारी सशक्तिकरण की मिसाल बनी रजिया सज्जाद
जूही बब्बर सोनी ने अभिनय के जरिए अपनी नानी रजिया सज्जाद के संघर्ष और जुझारूपन को मंच पर जीवंत किया। परिवार और रिश्तेदारों के सहारे के बिना उन्होंने अकेले अपनी चार बेटियों की परवरिश की। बेटियों की शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए उन्हें पढ़ाई के लिए विदेश तक भेजा, ताकि वे अपने पैरों पर खड़ी हो सकें। खुद शिक्षा हासिल करने के साथ बेटियों को भी शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाने का उनका सफर महिला सशक्तिकरण की मिसाल पेश करता है।
बार-बार शहर में प्रस्तुति देने की इच्छा जताई
कार्यक्रम के अंत में जूही बब्बर सोनी ने शहर में बार-बार अपने नाटक प्रस्तुत करने की इच्छा जताई। जूही ने कहा कि उनके पिता राज बब्बर भी गालिब के शहर से हैं और इस शहर में अभिनय करने का अवसर मिलना उनके लिए खास है। उन्होंने कहा कि वह अपने नाटकों के माध्यम से लोगों को जागरूक करना चाहती हैं। इसके लिए उन्होंने अमर उजाला का आभार भी जताया।




