लोगों को साइबर धोखाधड़ी और फर्जी काॅल से बचाने के लिए दूरसंचार विभाग ने चक्षु पोर्टल की सुविधा दी है। इस पर एक महीने में 31 संदिग्ध नंबरों की शिकायत मिली। ऋण लेने वाले और उनके रिश्तेदारों को धमकाया जा रहा था। इस बारे में विभाग की निदेशक खुशबू शर्मा ने पुलिस को अवगत कराया। पुलिस ने छानबीन की। इस पोर्टल पर 30 दिन के अंदर बैंक धोखाधड़ी, ई वालेट, सिम कार्ड, गैस एवं बिजली कनेक्शन, केवाईसी सहित अन्य साइबर अपराध की शिकायत की जा सकती है। पुलिस ने बताया कि वीवी एंटरप्राइजेज के नाम से बनाई गई फर्म सहारनपुर की महिला के नाम पर पंजीकृत है। उसका देवर फर्म संचालित करता है। कई खातों की जानकारी भी मिली है। भारतीय फाइनेंस कंपनियों से अनुबंध की बात मैनेजर ने कही है। उन्हें दस्तावेज दिखाने के लिए पुलिस ने कहा है। पुलिस पता कर रही है कि सिम बाक्स को वेंडर कहां से लेकर आते हैं। डीसीपी साइबर क्राइम आदित्य सिंह ने बताया कि सिम बाक्स के खरीद फरोख्त के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।
अवैध टेलीकॉम एक्सचेंज का पर्दाफाश, मैनेजर सहित दो गिरफ्तार
आवास विकास कॉलोनी के सेक्टर-12 स्थित सत्यम प्लाजा में बृहस्पतिवार को पुलिस और एसओजी ने एक अवैध टेलीकॉम एक्सचेंज का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को दबोच लिया। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्ट पोर्टल (एनसीआरपी) और दूरसंचार विभाग से मिले इनपुट के बाद यह कार्रवाई की गई। इस सेटअप के जरिये पिछले छह महीने से इंटरनेट कॉल को सिम बॉक्स से स्थानीय कॉल में बदलकर लोगों को डराया-धमकाया जा रहा था।
डीसीपी साइबर क्राइम आदित्य सिंह के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी खंदारी के नसीराबाद कॉलोनी निवासी आमिर सैफी और अलीगढ़ के गगौरी निवासी मनीष कुमार हैं। वीवी इंटरप्राइजेज नामक फर्म में मनीष मैनेजर है जबकि आमिर एडमिन। फर्म में 20 से 25 कर्मचारी लगे थे। गिरफ्तार आरोपियों से 8 सिम बॉक्स, 221 सिम, 96 रेडियो एंटीना, पांच लैपटॉप बरामद किए गए हैं। नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों, सिम कार्ड जारी कराने वालों, सिम बॉक्स के माध्यम से की गई कुल कॉल की जानकारी पुलिस जुटा रही है। बरामद चीनी सिम बॉक्स का प्रयोग भारत में प्रतिबंधित है।
एक ही स्थान पर आई लोकेशन
आरोपी अपना कॉल सेंटर चला रहे थे। बिना अनुमति सिम बॉक्स का इस्तेमाल कर राजस्व की हानि भी पहुंचा रहे थे। शिकायत हुई थी कि लोग कॉल कर परेशान कर रहे हैं। लोन की बकाया धनराशि मांग रहे हैं। गाली-गलौज कर धमकी दे रहे हैं। कानपुर सहित कई जिले के लोगों ने ऐसी शिकायत नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्ट पोर्टल और दूरसंचार विभाग से की थी। साइबर क्राइम थाने की पुलिस ने जांच की। जिन सिम नंबर से धमकी भरी कॉल की जा रही थीं, उन सभी की लोकेशन सत्यम प्लाजा में एक ही स्थान पर आ रही थी। इससे पुलिस इन तक पहुंच सकी।
रिश्तेदारों की भी ले लेते थे जानकारी
आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि करीब छह महीने पहले फर्म खोली थी। उनके पास विभिन्न कंपनियों की ऋण वसूली के लिए कॉल करने का कार्य है। वह निजी कंपनियों से ऋण लेकर नहीं चुकाने वालों को कॉल करते हैं। ब्रीच हंटर नामक सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करते हैं। इसमें मोबाइल नंबर डालने पर सिम धारक और उनके परिजन के नंबर की जानकारी भी आ जाती है। उन्हें कॉल कर परेशान किया जाता है। एक नंबर को ब्लॉक करो तो दूसरे से कॉल करने लगते हैं। लोगों के सगे-संबंधियों के नंबर भी हासिल कर ऋण नहीं चुकाने पर धमकी देते थे। पुलिस के मुताबिक, एक व्यक्ति को चार से अधिक सिम लेने के लिए दूरसंचार विभाग से अनुमति लेनी होती है।
सॉफ्टवेयर से मोबाइल टावर तक का सफर
डीसीपी ने बताया कि दूरसंचार विभाग का विभिन्न कंपनियों से अनुबंध रहता है। कोई भी व्यक्ति कहीं भी बैठकर अगर इंटरनेट के माध्यम से कॉल करता है तो टेलीकॉम कंपनी के माध्यम से आगे भेजी जाती है। इसके लिए संबंधित को हर महीने लाइसेंस फीस दूरसंचार विभाग को देनी होती है। अपनी केवाईसी भी करानी होती है। तब विभाग कॉलिंग की अनुमति देता है। कॉल को विभिन्न कंपनी डायवर्ट करती हैं।
मगर इस सिम बॉक्स से पूरे सिस्टम को बाईपास कर दिया जाता है। चीन से आयातित सिम बॉक्स में 8, 16, 32 तक सिम लग जाते हैं। सिम को कंप्यूटर सॉफ्टवेयर से ऑपरेट किया जाता है। कॉल किसी कंपनी और विभाग के पास भी नहीं जाती। सीधे सिम बॉक्स के माध्यम से मोबाइल टावर तक पहुंचती है। लोगों को लगता है कि कॉल करने वाले यहीं के हैं जबकि वो कहीं और होते हैं।
