बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की ओर से रविवार को दो पालियों में प्रदेश के 72 जिलों के 1011 पर आयोजित हुई बीएड की प्रवेश परीक्षा में चार लाख छात्र-छात्राएं शामिल हुए। परीक्षा के दौरान बीयू में बनें कंट्रोल रूम से निगरानी की जाती रही। वॉइस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल आधारित सिस्टम के उपयोग के दौरान अलर्ट आने पर कंट्रोल रूम से 2200 से अधिक बार परीक्षा केंद्रों पर फोन किया गया।
बीएड की पहली पाली की परीक्षा सुबह नौ से दोपहर 12 बजे तक चली, जिसमें सामान्य ज्ञान और भाषा (अंग्रेजी /हिंदी) से जुड़े 100 सवाल पूछे गए। पहली पाली में 4,00,507 परीक्षार्थियों ने परीक्षा दी। 44,451 छात्र-छात्राएं अनुपस्थित रहे। वहीं, दूसरी पाली में अभिरुचि परीक्षण और विषय (कला /विज्ञान /वाणिज्य /कृषि) से जुड़े 100 प्रश्न पूछे गए। इसमें 4,00,718 छात्र-छात्राएं परीक्षा में शामिल हुए। 44,240 परीक्षार्थियों ने परीक्षा छोड़ दी।
कुलसचिव ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया गया कि कासगंज और पीलीभीत में सबसे ज्यादा 95 फीसदी परीक्षार्थियों ने परीक्षा दी। जबकि, गाजियाबाद और गौतमबुद्धनगर में सबसे कम 84 प्रतिशत छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। झांसी में 86 फीसदी परीक्षार्थियों ने परीक्षा दी। उन्होंने बताया कि परीक्षा के दौरान इंटीग्रेटेड कंट्रोल कमांड सेंटर से कुछ ऐसे प्रकरण पाए गए, जिसमें फोटो के मिलान करने में भिन्नता मिली। जांच में अधिकांश प्रकरणों में एक ही अभ्यर्थी द्वारा दो या उससे अधिक आवेदन भरना पाया गया। कुछ प्रकरण में दो अलग-अलग अभ्यर्थियों के आवेदन पर एक ही फोटो लगी मिली, लेकिन पूछताछ करने पर फोटो अपलोड करने से संबंधित समस्या मिली। परीक्षा में बैठे अभ्यर्थी वास्तविक मिले।
बीयू में सामने आई लापरवाही, प्रश्नपत्र लेकर चले गए कई परीक्षार्थी
बीयू के नवीन परीक्षा भवन में परीक्षा के दौरान बड़ी लापरवाही सामने आई। कक्ष संख्या 106 में 121 परीक्षार्थी परीक्षा दे रहे थे। पहली पाली की परीक्षा खत्म होने के बाद कई परीक्षार्थी प्रश्नपत्र लेकर चले गए। बाद में इसकी जानकारी हुई तो अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए। परीक्षार्थियों से संपर्क साधना शुरू किया गया। बताया गया कि दूसरी पाली की परीक्षा से पहले परीक्षार्थियों से प्रश्नपत्र जमा करवाए गए। हालांकि, कुलसचिव का कहना है कि सिर्फ पांच परीक्षार्थी ही प्रश्नपत्र लेकर चले गए थे, जिसे कुछ ही समय बाद जमा करवा लिया गया था।
