चुनावी राज्य उत्तर प्रदेश में जीत की हैट्रिक के इरादे से उतर रही भाजपा ने प्रभारियों की टीम के माध्यम से प्रदेश के अगड़ा-पिछड़ा समीकरण को साधने की कोशिश की है। नई टीम में फायरब्रांड चेहरों के साथ संगठन में दक्ष चेहरों को जगह दी गई है। अब तक की सबसे बड़ी प्रभारियों की टीम में ओबीसी से तीन तो ब्राह्मण बिरादरी के दो चेहरों को जगह मिली है। हालांकि सबसे बड़ी टीम के बावजूद इसमें राज्य की राजनीति में अहम किरदार निभाने वाली दलित बिरादरी को जगह नहीं मिली है।

किन नेताओं को खास जिम्मा?

नई टीम में प्रभारी तावड़े समेत दो अन्य सह प्रभारी मेधा कुलकर्णी और प्रदीप वर्मा राज्यसभा के सदस्य हैं। शेष दो अनंत ओझा और जगदीश पटेल पूर्व विधायक हैं। इनमें तावड़े, वर्मा और जगदीश पटेल ओबीसी से हैं, जबकि कुलकर्णी और ओझा ब्राह्मïण बिरादरी से हैं। गौरतलब है कि इससे पहले बीते विधानसभा चुनाव के दौरान राज्य में चार सदस्यों वाली सबसे बड़ी प्रभारियों की टीम थी, जिसकी अगुवाई राधामोहन सिंह कर रहे थे।

संगठन का व्यापक अनुभव

नई टीम के सभी पांच चेहरों को संगठन का व्यापक अनुभव है। मसलन तावड़े ने बिहार का प्रभारी रहते राजग को विधानसभा चुनाव में एतिहासिक जीत दिलाई थी। झारखंड में दो बार विधायक रह चुके वैश्य बिरादरी के प्रदीप वर्मा राज्य में प्रदेश महासचिव और प्रदेश उपाध्यक्ष रह चुके हैं।

बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ बड़ा आंदोलन

इसी प्रदेश के अनंत ओझा राज्य में हिंदुत्व के फायरब्रांड चेहरा हैं। विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने ही प्रदेश में बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ बड़ा आंदोलन खड़ा किया था। ब्राह्मण बिरादरी की मेधा कुलकर्णी महिला मोर्चा की उपाध्यक्ष रही हैं।

अमित शाह की रणनीतिक टीम

उन्हें अगड़ी जातियों के हित में बात करने के मामले में मुखर नेता के रूप में जाना जाता है। पूर्व विधायक और वर्तमान में राष्ट्रीय सचिव जगदीश पटेल गुजरात विधानसभा चुनाव में गृह मंत्री अमित शाह की रणनीतिक टीम में कई बार अहम भूमिका निभा चुके हैं।



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