उरई। जिले में छह माह के दौरान 500 से अधिक ट्रांसफार्मर खराब हो गए। यानी औसतन हर दिन करीब तीन ट्रांसफार्मर जवाब देते रहे। इनकी मरम्मत पर करीब 80 लाख रुपये खर्च भी हुए। खराबी के बाद बिजली आपूर्ति बहाल करने में भी देरी हुई। कहीं तीन दिन तो कहीं एक सप्ताह से अधिक समय तक लोगों को बिजली संकट झेलना पड़ा। लगातार खराब हो रहे ट्रांसफार्मर और उन्हें समय पर बदलने की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

बिजली निगम के आंकड़ों के मुताबिक, खराब हुए ट्रांसफार्मरों में 25 केवीए क्षमता के 280 से अधिक, 63 केवीए के 90 से अधिक, 100 केवीए के करीब 50, 250 केवीए के 35 से अधिक और 400 केवीए के लगभग 10 ट्रांसफार्मर शामिल हैं। इनमें सबसे ज्यादा खराबी छोटे ट्रांसफार्मरों में हुई। इससे ओवरलोडिंग और बिजली की बढ़ती मांग के बीच ट्रांसफार्मरों की क्षमता की समीक्षा की जरूरत सामने आई है। लोगों का कहना है कि बिजली 24 घंटे का लेने के बाद भी कटौती बराबर बनी रही।

ट्रांसफार्मर खराब होने के बाद उन्हें बदलने में देरी से लोगों की परेशानी बढ़ी। कई इलाकों में तीन दिन तक आपूर्ति बाधित रही, जबकि कुछ जगहों पर नया ट्रांसफार्मर लगाने में एक सप्ताह से अधिक लग गया। इससे गर्मी में घरों के पंखे-कूलर बंद रहने के साथ पेयजल और रोजमर्रा के काम भी प्रभावित हुए।

बिजली कटौती के बावजूद ज्यादा बिल की शिकायत

उपभोक्ताओं का कहना है कि कई-कई घंटे बिजली गुल रहने के बावजूद बिल पहले से ज्यादा आया। हालांकि, आपूर्ति बाधित रहने से बिल अपने आप कम नहीं होता। बिल मीटर में दर्ज खपत और लागू शुल्कों के आधार पर बनता है। ऐसे में अधिक बिल की शिकायतों पर मीटर रीडिंग, दर्ज यूनिट और बिलिंग अवधि की जांच जरूरी है।

मरम्मत से आगे बढ़कर लोड की जांच जरूरी

ट्रांसफार्मरों की मरम्मत पर खर्च होने वाली करीब 80 लाख रुपये की अनुमानित राशि के बीच बार-बार खराबी के कारणों की जांच भी जरूरी है। घरों में एसी समेत बिजली के उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ने से मांग पर असर पड़ सकता है। ऐसे में जिन क्षेत्रों में बार-बार ट्रांसफार्मर खराब हो रहे हैं, वहां वास्तविक लोड का सर्वे कर क्षमता बढ़ाने और अतिरिक्त ट्रांसफार्मर की जरूरत का आकलन करना होगा। साथ ही, खराब ट्रांसफार्मर बदलने में लगने वाले समय को कम करने के लिए पर्याप्त वैकल्पिक व्यवस्था जरूरी है।

कई घंटे कटौती, फिर भी बिल ज्यादा

फोटो – 18 उमेश प्रजापति।

राजेंद्र नगर निवासी उमेश प्रजापति ने बताया कि गर्मी में कई-कई घंटे बिजली कटौती हुई। पंखे तक नहीं चल पाते थे, इसके बावजूद बिल पहले से ज्यादा आया।

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तुलसी नगर निवासी संजय ने बताया कि दिन में कई बार बिजली आती-जाती रही और रात में भी कटौती हुई। निगम को आपूर्ति सुधारने के साथ बिलिंग व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए।

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राजेश कुमार ने बताया कि गांव में लो-वोल्टेज और बार-बार बिजली जाने की समस्या बनी रही। ट्रांसफार्मर पर बढ़ते लोड के कारण आपूर्ति प्रभावित होती है। समस्या का स्थायी समाधान होना चाहिए।

यह बोले जिम्मेदार

उपभोक्ता अपने कनेक्शन पर इस्तेमाल होने वाले सही लोड की जानकारी नहीं देते, जिससे दिक्कत आती है। इस बार एसी का भी खूब इस्तेमाल हुआ, लेकिन उपभोक्ताओं ने इसकी जानकारी नहीं दी। अभियान चलाकर वास्तविक लोड का आकलन कराया जाएगा।

– जितेंद्र नाथ, अधिशासी अभियंता, बिजली निगम

फोटो - 17 शहर में खुले में रखा ट्रांसफार्मर। संवाद

फोटो – 17 शहर में खुले में रखा ट्रांसफार्मर। संवाद

फोटो - 17 शहर में खुले में रखा ट्रांसफार्मर। संवाद

फोटो – 17 शहर में खुले में रखा ट्रांसफार्मर। संवाद

फोटो - 17 शहर में खुले में रखा ट्रांसफार्मर। संवाद

फोटो – 17 शहर में खुले में रखा ट्रांसफार्मर। संवाद



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