उत्तर प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक स्कूलों में वर्षों से पढ़ा रहे वेतन न पाने वाले 811 तदर्थ शिक्षकों को भी जल्द वेतन दिया जाएगा। इसकी कानूनी अड़चनें दूर होंगी। सरकार इसके लिए नीति बनाएगी। कुल 1111 तदर्थ शिक्षकों में से अभी 300 शिक्षकों को वेतन दिया जा रहा है। अब शेष शिक्षकों को भी मिलेगा।

विधान परिषद में बेसिक, माध्यमिक व उच्च शिक्षा से संबंधित मुद्दों को लेकर नेता सदन व उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की अध्यक्षता में मंगलवार को समिति की बैठक हुई। इसमें विधान परिषद सदस्य देवेन्द्र प्रताप सिंह व उमेश द्विवेदी ने यह मामला उठाया। शिक्षिका ईशा सिंह के प्रकरण पर कोर्ट के आदेश के बाद करीब 300 शिक्षकों को वेतन दिया जा रहा है।

एमएलसी देवेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि नवंबर 2023 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एडहॉक व्यवस्था खत्म करने को लेकर दिए गए आदेश के बाद इन तदर्थ शिक्षकों को बाहर किया गया। पूर्व में दिए गए आदेश में वर्ष 2021 तक नियमित शिक्षकों की व्यवस्था करनी थी। फिलहाल 300 शिक्षकों को वेतन दिया जा रहा है और बाकी 811 शिक्षकों से काम लिए जाने के बावजूद वेतन नहीं दिया जा रहा। ऐसे में सरकार इन्हें लेकर नीति बनाए। बैठक में निर्देश दिए गए कि जल्द नीति बनाई जाए और बचे शिक्षकों को वेतन देने की तैयारी की जाए।

पुरानी पेंशन देने पर भी चर्चा की गई

वहीं साल 2024 में नियुक्त विशिष्ट बीटीसी शिक्षकों को पुरानी पेंशन देने, शिक्षामित्र से शिक्षक बनने वालों की पुरानी सेवा जोड़कर उन्हें भी पुरानी पेंशन का लाभ देने, 2000 के बाद नियमित शिक्षकों को पुरानी पेंशन देने पर भी चर्चा की गई। व्यावसायिक शिक्षकों व निजी स्कूलों के शिक्षकों के लिए जल्द सेवा नियमावली बनाने के भी निर्देश दिए गए। बैठक में विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव भी शामिल हुए।



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