गुजरात से मसाला और कृषि उत्पादों का कारोबार करने वाले व्यापारियों के कैश कैरियरों की रेकी कर लूटपाट करने वाले गिरोह का एसटीएफ ने पर्दाफाश किया है। गिरोह के छह सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें गिरोह का मास्टरमाइंड दिनेश चंद्र यादव उर्फ छोटू भी शामिल है। आरोपियों के पास से लूट के 48.45 लाख रुपये, एक अवैध पिस्टल, दो कारतूस, वारदात में इस्तेमाल बलेनो कार और रेकी में इस्तेमाल होने वाली बाइक बरामद हुई है।
एसटीएफ के एएसपी दीपक कुमार सिंह ने बताया कि गिरोह के सदस्य गुजरात से लखनऊ आने वाले कैश कैरियरों की गतिविधियों पर नजर रखते थे। उन्हें कारोबारियों के आने-जाने, नकदी और वाहनों की जानकारी पहले से मिल जाती थी। इसके बाद सुनसान जगह पर मौका देखकर वारदात को अंजाम देते थे। आरोपी कार से कैश कैरियर की स्कूटी में टक्कर मारकर उन्हें गिरा देते थे। फिर लोहे की रॉड और डंडों से हमला कर नकदी से भरा बैग लूट लेते थे। गिरोह का सरगना दिनेश यादव पिस्टल दिखाकर गोली मारने की धमकी देता था।
एसटीएफ ने आरोपियों को आठ नवंबर की रात गोमतीनगर क्षेत्र में सहारा पुल के नीचे क्रिकेट अकादमी के गेट के पास से गिरफ्तार किया। उनकी पहचान दिनेश चंद्र यादव, सौरभ यादव, अमन उर्फ रमन यादव, सौरभ दीक्षित, मोहित कनौजिया और ज्ञान सिंह के रूप में हुई है। गिरफ्तार आरोपियों में पांच लखनऊ के रहने वाले हैं, जबकि ज्ञान सिंह मूल रूप से बिहार के बेगूसराय का निवासी है।
कारोबारियों के बीच मौजूद था गिरोह का मुखबिर
पूछताछ में सामने आया कि गिरोह को कैश कैरियरों की जानकारी अमृत लाल पाल नाम का व्यक्ति देता था। वह गुजरात और लखनऊ के बीच नकदी लाने-ले जाने वाले कारोबारियों के संपर्क में था। उसे उनके आने-जाने के समय, ठिकानों और वाहनों की जानकारी रहती थी। वह यह जानकारी गिरोह के सदस्यों तक पहुंचाता था। इसके बदले उसे कमीशन देने की बात तय हुई थी। उसने गिरोह को भरोसा दिलाया था कि नकदी के बड़े लेनदेन के कारण व्यापारी पुलिस में शिकायत नहीं करेंगे।
गिरोह में शामिल मोहित कनौजिया कारोबारियों की रेकी करता था। वह जयपुरिया स्कूल के पीछे कारोबारी के ठिकाने के आसपास बिना नंबर की बाइक से नजर रखता था। जैसे ही कोई कैश कैरियर स्कूटी से निकलता, वह मोबाइल फोन से बाकी साथियों को सूचना दे देता था। इसके बाद सौरभ यादव कार से स्कूटी में टक्कर मारता था। कैश कैरियर के गिरते ही दिनेश पिस्टल दिखाकर धमकाता और बाकी आरोपी लोहे की रॉड व डंडों से मारपीट कर नकदी से भरा बैग लूट लेते थे।
विभूतिखंड से आशियाना तक चार वारदातें कीं
एसटीएफ के मुताबिक, पूछताछ में आरोपियों ने लखनऊ में चार बड़ी लूट की घटनाओं में शामिल होने की बात स्वीकार की है। दो मई को विभूतिखंड सब्जी मंडी के पास भाविक परमार और उनके साथी से 22 लाख रुपये लूटे थे। दोनों मसाले और कृषि उत्पादों के कारोबार के लिए नकदी लेकर जा रहे थे।
तीन जुलाई को विराटखंड में मितेश पटेल और उनके साथी से 45 लाख रुपये लूटे थे। आरोपी पहले से उनकी गतिविधियों पर नजर रख रहे थे। इसके बाद सफेद कार से स्कूटी में टक्कर मारकर दोनों को गिरा दिया और पिस्टल दिखाकर नकदी से भरा बैग लूट लिया।
तीन सितंबर को मेयो अस्पताल के पास भी कैश कैरियर को निशाना बनाया गया। वहीं, 24 अक्तूबर को आशियाना के सेक्टर-जी में गुजरात के कारोबारी की क्रेटा कार की डिग्गी से नकदी से भरा बैग लूट लिया गया। विरोध करने पर आरोपियों ने मारपीट की और हथियार दिखाकर फरार हो गए।
एसटीएफ के मुताबिक आरोपियों ने दयाल चौराहा, ग्वारी चौराहा और शंकर चौराहा पर भी कैश कैरियरों को लूटने के चार से पांच प्रयास किए थे, लेकिन पुलिस की गश्त और चौराहों पर भीड़ के कारण सफल नहीं हो सके।
लूट की रकम से खरीदी थी बलेनो कार
वारदातों में इस्तेमाल की गई बलेनो कार लूट की रकम से खरीदी गई थी। आरोपियों के पास से बरामद 48.45 लाख रुपये पहले की घटनाओं में लूटी गई रकम का बचा हुआ हिस्सा है। गिरफ्तार आरोपियों को गोमतीनगर थाने में पहले से दर्ज मुकदमे में दाखिल किया गया है। स्थानीय पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है।

