निर्माणाधीन छत्रपति शिवाजी महाराज म्यूजियम को देखने आ रहे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का शुक्रवार को बारिश के कारण कार्यक्रम निरस्त हो गया। सीएम आते तो राजकीय निर्माण निगम की लापरवाही और घटिया निर्माण गुणवत्ता की पोल खुल जाती। प्रवेश द्वार के पास ही दो जगह छत के स्लैब चटके हुए हैं। मुख्यमंत्री को जहां प्रजेंटेशन दिखाने के लिए एलईडी स्क्रीन और मंच सजाया गया था, वहां पानी टपकता रहा। पूरे म्यूजियम में 40 से ज्यादा पॉइंट ऐसे रहे जहां पानी झरने की तरह बहता रहा।

ताजमहल से एक किमी. दूर बनाए जा रहे शिवाजी म्यूजियम में किस तरह की गैलरी होंगी और स्वरूप कैसा होगा, इसका निरीक्षण करने के लिए मुख्यमंत्री को आगरा आना था। सुबह हुई बारिश ने म्यूजियम के निर्माण में बरती गई लापरवाही सामने ला दी। छत्रपति शिवाजी से जुड़ी गैलरी की जगह छत से टपका पानी भर गया। सीढि़यों पर टपकते पानी को रोकने के लिए कालीन बिछाया गया जो गीला होकर फिसलन भरा हो गया। मुख्यमंत्री को जिस गैलरी में निरीक्षण के लिए आना था, वह दो मंजिला है। भूतल पर पानी का रिसाव बेहद तेजी से होता रहा।

राजकीय निर्माण निगम की ओर से टाटा प्रोजेक्ट्स 197.27 करोड़ से म्यूजियम की इमारत का निर्माण प्री-कास्ट तकनीक से करा रहा है। होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश चौहान ने कहा कि 10 साल से इमारत बन रही है। ऐसे में यह जांच होनी चाहिए कि छत के स्लैब पर दरार कैसे आई और अब पानी कैसे टपक रहा है। 80 फीसदी काम पूरा होने का दावा किया जा रहा है। यह सीलन भवन के लिए नुकसानदेह है।

कागजों पर 18,188 वर्गमीटर छत का काम पूरा

शिवाजी म्यूजियम के कागजी आंकड़ों में 18,188 वर्गमीटर छत का काम पूरा हो चुका है। दूसरे तल पर केवल 150 वर्गमीटर का काम जारी है। 3,540 वर्गमीटर छत की वाटरप्रूफिंग भी हो चुकी है लेकिन पानी झरने की तरह बहकर मुख्यमंत्री के लिए बिछाए गए लाल कालीन पर आता रहा। म्यूजियम की दीवारें और फर्श पानी से तर रहे।

चार साल पहले आईआईटी रुड़की ने दी थी रिपोर्ट

वर्ष 2022 में तत्कालीन मंडलायुक्त ने शिवाजी म्यूजियम के भूतल पर प्रवेश द्वार की छत पर डाली गई प्री-कास्ट स्लैब और बीम में दरारें आने पर आईआईटी रुड़की से सर्वे कराया था। आईआईटी ने मार्च 2022 में अपनी रिपोर्ट में कई जगह दरारें और बीम की खामियों को दूर करने के लिए सुझाव दिए थे। उस रिपोर्ट के बाद ही चटकी हुई छत के स्लैब को सहारा देने के लिए लोहे का सपोर्ट लगाया गया। यह दोनों ओर की छत पर है। प्रवेश द्वार के अंदर जाते ही दायीं और बायीं ओर दरारें स्पष्ट नजर आती हैं। सपोर्ट के बाद भी दरारें लगातार बढ़ रही हैं।

राजकीय निर्माण निगम प्रोजेक्ट मैनेजर हरेंद्र सिंह ने बताया कि बारिश होने के कारण छत से पानी आया। सीएम का कार्यक्रम अचानक बना इसलिए छत पर काम नहीं हो पाया। अब उसका काम कराएंगे। आईआईटी रुड़की ने जो सिफारिशें की थीं उसी के तहत सपोर्ट लगाया गया है। चटके स्लैब को बदलना मुमकिन नहीं है। 

 



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