कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे की सड़क धंसने का सिलसिला रुक नहीं रहा है। लोकार्पण के 13वें दिन से ही धंसनी और टूटनी शुरू हुई 4200 करोड़ की सड़क की अलग-अलग स्थानों पर लगातार 23वें दिन भी मरम्मत जारी रही। हालत यह है कि 24 किमी लंबे ग्रीन फील्ड क्षेत्र (उन्नाव से बनी) की लगभग 80 प्रतिशत सड़क में मरम्मत और पैचिंग होने के बाद भी, हल्की बारिश में ही नई समस्या हो जाती है। रविवार अलग-अलग चार स्थानों पर सड़क उखड़ने और दबने पर निर्माण एजेंसी ने यहां भी मरम्मत शुरू कराई। इनमें दो जगह लखनऊ से कानपुर जाने वाली लेन खराब हुई है।
कानपुर से लखनऊ जाने वाली लेन पर आजाद मार्ग टोल प्लाजा की तरफ किमी संख्या 62 पर कानपुर से लखनऊ जाने वाली लेन पर अड़ेरुआ गांव के रविवार को तीस मीटर सड़क जगह-जगह धंसने से उसकी ऊपरी परत को उखाड़ को दोबारा बनने का काम शुरू किया गया। 62.5 पर भी सड़क दबनी शुरू हो गई है। इसी लेन पर नेवरना गांव के पास किमी संख्या 58 से 59 पर 100 मीटर सड़क इतनी धंस गई कि यहां पहुंचते ही वाहन लहराने लगते हैं। वाहन चालक किसी तरह रफ्तार को नियंत्रित कर निकल रहे हैं। इस सौ मीटर में नाली (व्हील ट्रैक) बन गईं हैं। मरम्मत करा रहे इंजीनियर का कहना है कि पानी सड़क के अंदर जाने से नीचे की मिट्टी और गिट्टी गीली होने से सड़क कमजोर होने और वाहन निकलने से दब रही है। इसी लेन पर किमी संख्या 49 पर भटखेरवा गांव के पास पचास मीटर धंसी है और किमी संख्या 49 पर लखनऊ से कानपुर जाने वाली लेन के 50 मीटर हिस्से में सड़क को उखाड़ कर दोबारा बनाया जा रहा है।
लखनऊ की तरफ दो स्थानों पर एक्सप्रेसवे दबा है। यहां लखनऊ से कानपुर की लेन पर किमी संख्या 31.5 सहरावां नहर पुल के ऊपर की स्लैब पर डामर-गिट्टी की परत (विटुमिन) पहली ही बारिश में उखड़ गई है। गिट्टी फैलने से वाहनों के लिए खतरे को देखते हुए इसकी मरम्मत शुरू कराई गई है। यहां पर दो लेन को बंद करके एक हाईस्पीड लेन से वाहनों को निकाला जा रहा है। वहीं किमी संख्या 53.6 पर बाबाखेड़ा अंडरपास ज्वाइंट के पास सड़क दबने से डिवाइडर तिरछा हो गया और उसमें दरार हो गई है और गड्ढा होने से पानी भरने लगा है। हालांकि जेई का कहना है कि डिवाइडर पर कंक्रीट बोल्डर लगाए गए हैं, वह टूटा नहीं है, केवल जोड़ खुल गया है।