उत्तर प्रदेश के पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने विधान भवन स्थित अपने कार्यालय में विभागीय कार्यों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को गौशालाओं के अवस्थापना (इंफ्रास्ट्रक्चर) संबंधी कार्य अक्टूबर 2026 तक हर हाल में पूर्ण कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और निर्धारित मानकों का विशेष ध्यान रखा जाए, क्योंकि किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और ऐसा होने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होगी। 

पशुओं के बेहतर स्वास्थ्य और सुविधा के लिए उन्होंने प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में एक पशु चिकित्सालय की स्थापना हेतु स्थानीय विधायकों से समयबद्ध ढंग से प्रस्ताव प्राप्त करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही, प्रदेश की गौशालाओं का नियमित निरीक्षण करने को कहा ताकि वहां बने भूसा बैंकों में सालभर के लिए पर्याप्त भूसा उपलब्ध रहे और पशुओं के लिए हरे चारे की कोई कमी न हो। 

आगामी वर्षा ऋतु को देखते हुए वृहद गौ संरक्षण केंद्रों में सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय रहते पूरी करने तथा गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रत्येक गौशाला में गोबर गैस प्लांट स्थापित करने के भी निर्देश दिए गए। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से उन्होंने प्रत्येक ग्राम पंचायत में दुग्ध समिति का गठन अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करने पर बल दिया, जिससे दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा मिले और दुग्ध उत्पादक किसान आर्थिक रूप से सशक्त हो सकें। 

बैठक में अपर मुख्य सचिव मुकेश कुमार मेश्राम ने मंत्री को विभाग की अद्यतन प्रगति से अवगत कराया और उनके दिशा-निर्देशों का अक्षरशः पालन करने का आश्वासन दिया। इस समीक्षा बैठक में विशेष सचिव पशुधन देवेंद्र पांडेय, पीसीडीएफ के प्रबंध निदेशक वैभव श्रीवास्तव और दुग्ध विकास विभाग के विशेष सचिव राम सहाय यादव सहित कई अन्य वरिष्ठ योजनाधिकारी उपस्थित रहे।



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