प्रदेश में तकनीकी गड़बडी से कई बिजली उत्पादन इकाइयां ठप हो गई हैं। इससे उत्तर प्रदेश के हिस्से की करीब चार हजार मेगावाट बिजली उत्पादन प्रभावित हुई है। इन इकाइयों को ठीक करने के लिए टीमें लगी हैं। उम्मीद है कि 21 जून तक सभी इकाइयां फिर से उत्पादन करने लगेंगी।

प्रदेश में इन दिनों अधिकतम बिजली की मांग करीब 30 से 31 हजार मेगावाट के बीच बनी हुई है। अधिकतम मांग बढ़ने के साथ ही न्यूनतम मांग में भी इजाफा हुआ है। सप्ताहभर पहले जहां न्यूनतम मांग 15 हजार मेगावाट थी, वह बढ़कर अब 22 हजार मेगावाट से अधिक हो गई है। इस बीच 18 जून की शाम सिंगरौली क्षेत्र की दोनों उच्च वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइनों में अर्थ फॉल्ट आ गया। इससे ट्रिपिंग हुई और एनटीपीसी की रिहंद तापीय विद्युत स्टेशन की तीनों इकाइयों से करीब तीन हजार मेगावाट बिजली उत्पादन ठप हो गया। 

इसमें करीब 960 मेगावाट विद्युत हिस्सा उत्तर प्रदेश का था। इसी तरह कई इकायां तकनीकी कारणों से ठप हो गई हैं। इसमें केंद्रीय सेक्टर की ज्वाइंट वैचर की घाटमपुर यूनिट-2 से 660 मेगावाट खुर्जा यूनिट 2 से 660 मेगावाट, ललितपुर तापीय परियोजना यूनिट-3 से 660 मेगावाट, अनपरा-सी यूनिट-1 से 600 मेगावाट, रोजा यूनिट-1 से 300 मेगावाट सहित कुल करीब 3041 मेगावाट का उत्पादन प्रभावित हुआ है। इसी तरह राज्य विद्युत उत्पादन निगम की ओबरा-सी यूनिट-2 एवं हरदुआगंज-डी यूनिट-9 भी तकनीकी कारणों से प्रभावित रही, लेकिन देर शाम तक उन्हें चालू कर दिया गया है। पावर कार्पोरेशन के प्रवक्ता ने बताया कि तकनीकी कारणों से प्रभावित होने वाली उत्पादन इकाइयों में टीमें लगी हैं। विद्युत मांग को पूरा करने में चुनौतियां जरूर आई हैं, लेकिन पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा विद्युत उपलब्धता बनाए रखने में तत्पर है। विभिन्न स्त्रोतों से अतिरिक्त विद्युत व्यवस्था का निरंतर प्रयास किया जा रहा है। विद्युत व्यवस्था की सतत निगरानी की जा रही है।



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