सपा प्रमुख अखिलेश यादव का दौरा बृहस्पतिवार को कई मायने में अलग रहा। समर्थकों की ऐसी भीड़ दिखी जो इससे पहले कभी नहीं दिखी। ऐसा जोश जैसे कि चुनावी जनसभा में अखिलेश आ रहे हों। वहीं सपाइयों ने विधानसभा चुनाव से पहले अपने होमवर्क की झलक को दिखा दिया। सबसे खास बात यह रही कि अखिलेश यादव ने मंच से कांग्रेस से गठबंधन के साफ संकेत भी दे दिए। उन्होंने कांग्रेस का नाम नहीं लिया लेकिन इशारों में अपनी रणनीति का खुलासा कर दिया।
सपा प्रमुख से गठबंधन के मुद्दे पर मंच से ही कहा कि विधानसभा चुनाव हम जीतने जा रहे हैं। पहली बार उन्होंने किसी सभा में हम शब्द का प्रयोग किया। इसी से संकेत मिल गया कि कांग्रेस और सपा का गठबंधन होगा। इसकी तस्दीक भी अखिलेश ने कर दी। कहा कि सामाजिक न्याय की स्थापना चाहते हैं। इस कारण गठबंधन होगा, हम साथ चलेंगे। जीतने वाली सीटें गठबंधन तय करेगा। बात सीट की नहीं, जीत की होगी। असल में नौ सितंबर को जब राहुल गांधी दिशा की बैठक में भाग लेने आए थे तो सपा के कई प्रतिनिधियों ने राहुल गांधी से मुलाकात की थी। इससे साफ होने लगा था कि विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस और सपा की केमिस्ट्री मेल खाने वाली है।
सामान्य नागरिक संहिता के मुद्दे को भी अखिलेश ने मंच से उठाया कि चुनाव आते ही भाजपा इस मुद्दे को उठाने लगी है। जबकि जरूरी है कि समाज में एकरूपता हो। किसी के साथ कोई भेदभाव न हो। उन्होंने कहा कि हम संविधान की रक्षा कर रहे हैं। भाजपा चुनाव जीतने के लिए धर्म को मुद्दा बनाती है लेकिन लोग अब इनके झांसे में नहींं आने वाले हैं।
