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उत्तर प्रदेश सरकार की वाहन स्क्रैपिंग (Vehicle Scrappage) नीति अब राज्य में बड़ा असर दिखाने लगी है। सरकार के मुताबिक, इस नीति के लागू होने के बाद 30 जून तक 1.95 लाख से अधिक पुराने और अनुपयोगी वाहनों को अधिकृत स्क्रैपिंग केंद्रों के माध्यम से वैज्ञानिक तरीके से नष्ट (स्क्रैप) किया जा चुका है।
सरकार का कहना है कि इस पहल का मकसद केवल पुराने वाहनों को हटाना नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा बढ़ाना, प्रदूषण कम करना और आधुनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत बनाना भी है।

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Vehicle Scrapping
– फोटो : Adobe Stock
उत्तर प्रदेश में अब तक कितने पुराने और सरकारी वाहन स्क्रैप किए जा चुके हैं?
राज्य में इस नीति के लागू होने के बाद से स्क्रैपिंग प्रक्रिया ने तेज रफ्तार पकड़ी है, जिसके आधिकारिक आंकड़े ये हैं:
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कुल स्क्रैप किए गए वाहन:
30 जून तक राज्य में 1.95 लाख से अधिक पुराने और अनुपयोगी वाहनों का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जा चुका है।
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निजी वाहन:
कुल आंकड़ों में से 1.85 लाख से अधिक निजी वाहनों को अधिकृत केंद्रों के जरिए स्क्रैप किया गया है।
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सरकारी वाहन:
इसके अलावा, 10,000 से अधिक सरकारी वाहनों को भी सेवा से बाहर कर वैज्ञानिक ढंग से नष्ट कर दिया गया है।
वाहन स्क्रैपिंग की प्रक्रिया को पारदर्शी और आसान कैसे बनाया गया है?
उत्तर प्रदेश सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया को आधुनिक तकनीक पर आधारित, पारदर्शी और वाहन स्वामियों के लिए बेहद सुलभ बनाया है:
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आरवीएसएफ (RVSF) का नेटवर्क:
राज्य में वर्तमान में 101 पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग सुविधाएं (RVSF) रजिस्टर्ड हैं, जिनमें से 50 केंद्र पूरी तरह से चालू हैं।
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ऑनलाइन और डिजिटल सिस्टम:
पूरी प्रक्रिया केंद्र सरकार के V-Scrap पोर्टल और ‘वाहन’ (Vahan) सिस्टम के माध्यम से ऑनलाइन संचालित की जाती है।
मतलब: डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग होने से पारदर्शिता सुनिश्चित होती है और गाड़ी मालिकों को किसी भी तरह के अनावश्यक झंझट या दलालों के चक्कर नहीं काटने पड़ते।

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Vehicle Scrapping
– फोटो : Freepik
स्क्रैपिंग नीति लागू करने के पीछे उत्तर प्रदेश सरकार का मुख्य उद्देश्य क्या है?
परिवहन विभाग द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, सरकार का उद्देश्य केवल खटारा गाड़ियों को हटाना नहीं है, बल्कि एक व्यापक बदलाव लाना है:
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सुरक्षित और आधुनिक परिवहन:
इस नीति का मुख्य लक्ष्य राज्य में एक सुरक्षित, साफ और आधुनिक परिवहन सिस्टम तैयार करना है।
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पर्यावरण और सड़क सुरक्षा:
इससे सड़क दुर्घटनाओं, वायु प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी, जबकि वाहनों की ईंधन दक्षता बढ़ेगी।
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औद्योगिक और आर्थिक लाभ:
स्क्रैप धातु और अन्य सामग्रियों का वैज्ञानिक रिसाइकिलिंग संभव होगा, जिससे नया निवेश आकर्षित होगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
किसी गाड़ी को ‘अनफिट’ और ‘स्क्रैप’ करने का तकनीकी पैमाना क्या है?
इस नीति के तहत केवल उन्हीं वाहनों को बाहर किया जा रहा है जो निर्धारित तकनीकी और सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरते:
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कंप्यूटरीकृत ऑटोमेटेड टेस्ट:
वाहनों का फिटनेस टेस्ट आधुनिक ‘ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशनों’ (ATS) में बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के अत्याधुनिक कंप्यूटरीकृत मशीनों द्वारा किया जाता है।
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अनफिट और एंड ऑफ लाइफ व्हीकल (ELV) घोषणा:
यदि कोई वाहन मानकों में विफल रहता है, तो उसे पहले ‘अनफिट’ घोषित किया जाता है। री-टेस्ट (पुनः परीक्षण) में भी फेल होने पर उसे ‘एंड ऑफ लाइफ व्हीकल’ (ELV) घोषित कर स्क्रैपिंग प्रक्रिया में शामिल कर दिया जाता है।

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Vehicle Scrapping
– फोटो : Adobe Stock
राज्य में स्क्रैपिंग केंद्रों के विस्तार को लेकर क्या योजना है?
सरकार राज्य के हर जिले तक इस सुविधा का विस्तार करने के लिए निजी क्षेत्र को प्रोत्साहित कर रही है:
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निजी निवेश को बढ़ावा:
जिन जिलों में अभी तक स्क्रैपिंग सेंटर स्थापित नहीं हुए हैं, वहां निजी निवेश के जरिए नए केंद्र खोलने को प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
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30 नए केंद्रों के प्रस्ताव प्रक्रियाधीन:
वर्तमान में 30 नए स्क्रैपिंग सेंटरों के प्रस्ताव और आवेदन प्रक्रियाधीन हैं। भविष्य में यह सुविधा राज्य के लगभग सभी जिलों तक पहुंच जाएगी।
पुराना वाहन स्क्रैप कराने पर गाड़ी मालिक को क्या-क्या फायदे मिलते हैं?
यह नीति वाहन मालिकों के वित्तीय हितों का भी पूरा ध्यान रखती है और उन्हें कई तरह के प्रोत्साहन देती है:
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सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट:
अधिकृत केंद्र पर वाहन जमा करने के बाद मालिक को एक ‘सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट’ जारी किया जाता है।
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स्क्रैप वैल्यू:
गाड़ी मालिक को उसकी स्क्रैप की गई पुरानी गाड़ी का उचित मूल्य दिया जाता है।
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नई गाड़ी की खरीद पर टैक्स में छूट:
इस सर्टिफिकेट के आधार पर नया वाहन खरीदने पर व्यावसायिक वाहनों के लिए 10 प्रतिशत तक और निजी वाहनों के लिए 15 प्रतिशत तक रोड टैक्स में छूट दी जाती है।
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सर्टिफिकेट बेचने की सुविधा:
यदि वाहन मालिक तुरंत नई गाड़ी नहीं खरीदना चाहता, तो वह तय प्रक्रियाओं के तहत अपने ‘सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट’ को किसी अन्य जरूरतमंद व्यक्ति को बेच भी सकता है।

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इस नीति से उद्योगों को कच्चा माल और रोजगार कैसे मिलेगा?
वाहनों के वैज्ञानिक निस्तारण से देश के विभिन्न विनिर्माण क्षेत्रों को बड़ा फायदा मिल रहा है:
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किफायती कच्चा माल:
इस नीति से ऑटोमोबाइल, स्टील, एल्युमीनियम, कॉपर, प्लास्टिक और रबर रिसाइकिलिंग उद्योगों को बेहतर और सस्ता कच्चा माल मिल रहा है, जिससे मैन्युफैक्चरिंग लागत में कमी आ रही है।
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रोजगार के नए अवसर:
व्हीकल स्क्रैपिंग, लॉजिस्टिक्स, मशीन ऑपरेशन, क्वालिटी टेस्टिंग और एनवायरनमेंट मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बड़े पैमाने पर नए रोजगार पैदा हो रहे हैं।
