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श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पुनर्गठन के साथ ही ट्रस्ट में पूर्व महासचिव चंपत राय की वापसी को लेकर चल रहे कयासों पर विराम लग गया है। नए न्यासियों की घोषणा में उनका नाम शामिल नहीं है, लेकिन ट्रस्ट की नई व्यवस्था में उनकी मौजूदगी पद के बजाय प्रभाव, अनुभव और मार्गदर्शन के रूप में नजर आ रही है।
वर्षों तक राम मंदिर निर्माण और व्यवस्थाओं की कमान संभाल चुके चंपत राय भले अब औपचारिक तौर पर ट्रस्ट का हिस्सा न हों, लेकिन मंदिर से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों में उनका अनुभव नई टीम के लिए अहम बना रह सकता है।
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चंपत राय व अनिल मिश्रा।
नए न्यासियों के चयन में भी चंपत राय की राय को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नवनियुक्त कोषाध्यक्ष महेश भागचंदका को उनके करीबी लोगों में माना जाता है। वहीं, महासचिव की जिम्मेदारी संभालने के बाद गोविंद देव गिरि की चंपत राय से हुई मुलाकात ने भी नई व्यवस्था में अनुभव और निरंतरता की चर्चा को हवा दी है।
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माना जा रहा है कि दोनों के बीच मंदिर की आगामी व्यवस्थाओं और चुनौतियों को लेकर विचार-विमर्श हुआ। नई टीम के सामने सिर्फ मंदिर निर्माण पूरा कराने की चुनौती नहीं है।
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राम मंदिर
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
राय के अनुभव को पूरी तरह नजरअंदाज करना आसान नहीं
राम मंदिर में बढ़ती श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच दर्शन व्यवस्था, यात्री सुविधाएं, सुरक्षा, वित्तीय प्रबंधन, धार्मिक आयोजनों और भविष्य की योजनाओं को व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाना भी बड़ी जिम्मेदारी है। ऐसे में लंबे समय तक इन सभी पहलुओं से सीधे जुड़े रहे चंपत राय के अनुभव को पूरी तरह नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा।
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चंपत राय
– फोटो : अमर उजाला
जिम्मेदारी बदली, अयोध्या से रिश्ता नहीं
ट्रस्ट की जिम्मेदारी से अलग होने के बाद भी चंपत राय की अयोध्या में सक्रियता बनी हुई है। वह मठ-मंदिरों के धार्मिक आयोजनों और प्रमुख उत्सवों में लगातार नजर आ रहे हैं। इससे संकेत मिलता है कि रामनगरी से उनका जुड़ाव किसी संगठनात्मक पद तक सीमित नहीं है। नई टीम के हाथ में अब निर्णय और संचालन की बागडोर होगी, जबकि चंपत राय का अनुभव जरूरत के समय सलाह और मार्गदर्शन का आधार बन सकता है।