उत्तर मध्य रेलवे के सहायक परिचालन प्रबंधक (एओएम) अभिषेक सिंह कुशवाहा की रविवार रात संदिग्ध हालात में मौत हो गई। उनका शव डीआरएम कार्यालय परिसर में वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक (सामान्य) कुलदीप मीणा के केबिन में सोफे पर पड़ा मिला। पत्नी आस्था रानी ने उन पर मानसिक-शारीरिक प्रताड़ना, गाली-गलौज और धमकी देने का आरोप लगाते हुए थाना सदर में तहरीर दी है। केबिन में ही एक डायरी में सुसाइड नोट लिखा मिला है।
गाजीपुर जिले के थाना सैदपुर क्षेत्र में गांव खजुरा निवासी अभिषेक सिंह कुशवाहा पुत्र नागेंद्र सिंह कुशवाहा उत्तर मध्य रेलवे के आगरा मंडल में एओएम थे। 17 अगस्त को प्रयागराज मंडल से प्रोन्नति के बाद उनका स्थानांतरण आगरा हुआ था। रविवार को उनकी पीईटी की वजह से रात में ड्यूटी लगी थी। जहां शव मिला वहां केबिन में उल्टियां हुई थीं और विषाक्त पदार्थ के दो पाउच भी मिले। रात करीब 11 बजे अभिषेक को रेलवे अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने मोबाइल, डायरी और पाउच कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।
2 of 8
परिवार के साथ रेलवे अफसर की फाइल फोटो
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
भारी तनाव में थे अभिषेक सिंह कुशवाहा
आगरा में डीआरएम ऑफिस में मृत मिले रेलवे कर्मचारी सहायक परिचालन प्रबंधक अभिषेक सिंह कुशवाहा भारी तनाव में थे। उन पर काम का प्रेशर अधिक था। पुलिस को उनकी डायरी में दो पन्नों पर लिखा सुसाइड नोट मिला है। इसमें उन्होंने किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया है। यही लिखा कि वह खुद को इस नाैकरी में फिट नहीं कर पा रहे हैं। माफ करना सोसाइटी…अब विदा लेने का समय आ गया।
3 of 8
रेलवे अफसर का परिवार
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
उन्होंने अंग्रेजी और हिंदी में लिखा कि पंक्चुअलिटी लॉस होती जा रही है। एडमिनिस्ट्रेशन पर बर्डन होता जा रहा हूं। ढाई मंथ हो जाने के बाद भी मैं अभी भी आगरा मंडल में शून्य हूं। कोई प्रोग्रेस नहीं हो रही है। मैं ट्रेन चार्टिंग भी नहीं सीख पा रहा हूं। ऑफिसर्स के सामने ब्लैंक होता जा रहा हूं। स्टेशन यार्ड सारी ट्रेन्स का टाइमिंग, उनका प्लेटफार्म डिक्शनरी ये सब भी नहीं याद रह पा रहा है।
4 of 8
रेलवे अफसर की पत्नी
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मेरी अक्षमता की वजह से रेल एडमिनिस्ट्रेशन सफर कर रहा है। साथ ही मेरी फैमिली भी, क्योंकि ऑफिसर का प्रेशर घर लेकर जा रहा हूं। पिछले 1 मंथ से कोई ऐसा दिन नहीं है, जिसमें पूरा दिन फैमिली के साथ रहा हूं। ऐसा जीवन, जीवन नहीं, मृत्यु से भी बदतर है। मैं मृत होकर ही जी सकता हूं। ऐसे में मर रहा हूं। मेरी किसी से कोई शिकायत नहीं है। मैं इस समाज और सरकारी नाैकरी में फिट नहीं कर पा रहा हूं खुद को।
5 of 8
रेलवे अफसर के परिजन
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
जिंदगी में कोई रिवर्स गियर नहीं…
उन्होंने आखिर में अंग्रेजी में लिखा कि जिंदगी में कोई रिवर्स गियर नहीं होता है। आपको हमेशा आगे ही बढ़ना होता है। समाज क्या कहेगा, जिसके चलते आप अपने पुराने पेशे में भी नहीं जा सकते। सोसाइटी क्या कहेगी। आप इस नौकरी से त्यागपत्र भी नहीं दे सकते। साॅरी सोसाइटी। माफ करना। अब विदा लेने का समय आ गया। पिता की मृत्यु और बच्चों की देखभाल के बारे में अलग पन्ने पर जिक्र किया है।