इलाहाबाद हाईकोर्ट ने करीब 41 साल पुराने हत्या और डकैती के प्रयास से जुड़े मामले की सुनवाई में विवेचना पर हैरानी जताई। कहा कि घटनास्थल के आंगन में दरवाजे के पास खून मिला था, जबकि मृतक का शव चारपाई पर पाया गया। इसके बावजूद विवेचक ने यह पता लगाने की कोशिश ही नहीं की कि घायल को चारपाई तक कैसे और किन परिस्थितियों में लाया गया।

इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति तेज प्रताप तिवारी की एकल पीठ ने जगनायक सिंह और संतोष की अपील स्वीकार कर ली। साथ ही उन्हें मिली सात-सात साल के कठोर कारावास की सजा का आदेश रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि संदेह कितना भी गहरा क्यों न हो, वह कानूनी साक्ष्य का विकल्प नहीं बन सकता।

मामला बांदा जिले के पैलानी थाना क्षेत्र के अलीना गांव का है। अभियोजन के अनुसार, 27 सितंबर 1983 की रात दीनदयाल की घर में घुसकर हत्या कर दी गई थी। उनकी पत्नी धुरिया भी घायल हुई थीं। आरोप था कि जगनायक सिंह तमंचा, संतोष फारसा और रामराज लाठी लेकर घर में घुसे थे। लूटपाट के प्रयास का विरोध करने पर दीनदयाल की हत्या कर दी गई।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *