उत्तर प्रदेश की अधिकतर शत्रु संपत्तियां अवैध कब्जों में फंसी हुई हैं। एनसीआर से पूर्वांचल तक अरबों रुपये की संपत्तियों पर कब्जा कर मोटी कमाई की जा रही है। एनसीआर के कई जिलों में मॉल, होटल तक बन गए हैं। कई सरकारी विभाग भी इन संपत्तियों पर कब्जा कर इनका इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसी संपत्तियों को खाली कराना शत्रु संपत्ति अभिरक्षा कार्यालय के लिए बड़ी चुनौती है।
लखनऊ अभिरक्षा कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार, यूपी उत्तराखंड में करीब 5600 शत्रु संपत्तियां हैं। इनमें से लगभग 70 संपत्तियां उत्तराखंड में हैं, बाकी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में हैं। कार्यालय लगातार अपनी संपत्तियों का चिह्नीकरण और वर्तमान स्थिति का सत्यापन करवाता रहता है। सूत्रों के मुताबिक, सत्यापन रिपोर्ट से खुलासा हुआ कि गाजियाबाद और नोएडा की शत्रु संपत्तियों पर मॉल बन चुके हैं। यहीं पर तीन होटल भी चल रहे हैं। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में हाईराइज बिल्डिंगों का निर्माण भी किया गया है। इन पर कब्जा करने वाले काफी शक्तिशाली लोग हैं। उनकी पहुंच प्रदेश और केंद्र सरकार के बड़े नेताओं तक है। अभिरक्षा कार्यालय से पहले इनको नोटिस भेजे गए और फिर मामला कोर्ट में चला गया। जहां केस चल रहा है।
लखनऊ में भी कब्जों की भरमार
राजधानी के दुबग्गा में पूरी बस्ती शत्रु संपत्ति पर बसा दी गई है। वहीं सरोजनीनगर समेत अन्य कई इलाकों में अरबों रुपये की शत्रु संपत्तियों पर कब्जे हैं। प्रदेश में तमाम संपत्तियों पर लोग खेती भी कर रहे हैं। संबंधित जिला प्रशासन उनको नोटिस भेजकर खाली करने का निर्देश दे रहे हैं।
कुछ पर कार्रवाई भी हुई
अभिरक्षा कार्यालय की तरफ से कार्रवाई भी शुरू हो चुकी है। लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी इलाके में दो नामी बिल्डरों ने करोड़ों की शत्रु संपत्ति अपने प्रोजेक्ट में शामिल कर ली थी। बीते पांच-छह महीने से मामला चल रहा था। कुछ दिन पहले ही इन संपत्तियों को कब्जा मुक्त कराया गया है। इसी तरह से बदायूं में अजन्ता होटल भी सील किया गया है जो शत्रु संपत्ति पर कब्जा कर बनाया गया था।
प्राधिकरण ने ही बसा दी कॉलोनी: इन हाईराइज बिल्डिंगों में से कुछ का इस्तेमाल वाणिज्यिक और कुछ का आवासीय हो रहा है। सूत्रों के अनुसार इलाहाबाद विकास प्राधिकरण ने भी कुछ शत्रु संपत्तियों पर कॉलोनी बनाई है। एनएचएआई ने बदायूं और मुजफ्फरनगर सहित कई जिलों में शत्रु संपत्तियों से सड़कें निकाली हैं। अधिकारियों के मुताबिक, सभी मामलों में केस चल रहा है। इन सभी स्थितियों को देखते हुए गृह मंत्रालय ने सख्त रुख अपनाया है, जिससे संपत्तियों को कब्जा मुक्त कराया जा सके।
