बाह। पुरा जसोल गांव के गोवर्धन को सेवानिवृत्त हुए 14 साल हो गए, लेकिन आज भी उनका समर्पण, सादगी और शिक्षण के प्रति निष्ठा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनी हुई है। 76 साल की उम्र में भी वह हर रोज साइकिल से स्कूल जाते हैं। बच्चों को निशुल्क पढ़ाते हैं। कहते हैं कि स्कूल में बच्चों को पढ़ाए बिना उन्हें नींद नहीं आती।

वह हर सुबह घर से स्कूल के लिए निकलते हैं। उनकी साइकिल मंगदपुर, चौरंगा बीहड़, जरार, हिंगोट खेडा या पार्वतीपुरा के स्कूल में जाकर रुकती है। 6 से 8वीं तक के बच्चों को गणित पढ़ाते हैं। गोवर्धन ने बताया 20 दिसंबर 1979 में बुढैरा गांव के प्राथमिक विद्यालय में भर्ती हुए थे। उसके बाद चांगौली, तरासों, हिंगोटखेडा में पढ़ाने के बाद मंगदपुर के जूनियर हाईस्कूल में नियुक्ति मिली थी। 32 साल की सेवा के बाद वर्ष 2012 में मंगदपुर के जूनियर हाईस्कूल से सेवानिवृत्त हुए थे। उनके दो बेटों में से एक रविंद्र कुमार फिरोजाबाद में शिक्षक हैं। दूसरे प्रवेंद्र कुमार बिजली विभाग में सेवारत हैं। उन्होंने बताया कि अभाव की जिंदगी में पढ़े, अपने बेटों को पढ़ाया। यही वजह है कि जीते जी पढ़ाते रहेंगे। कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। स्कूल में बच्चों को पढ़ाए बिना उन्हें नींद नहीं आती, यही वजह है कि हर रोज स्कूल जाते हैं।

गणित की बारीकियां सीखने का उत्सुक रहते हैं बच्चे

गोवर्धन का सानिध्य पाने वाली मंगदपुर के जूनियर हाईस्कूल की शिक्षिका रीता भदौरिया, ममता श्रीवास्तव उनकी कर्तव्य परायणता एवं शिक्षण के प्रति समर्पण की कायल हैं। शिक्षक मान सिंह, अशोक कुमार, मुकेश कुमार ने बताया वह शिक्षक शिक्षिकाओं के लिए प्रेरणापुंज बने हुए हैं। स्कूल में बच्चे उनसे गणित की बारीकियां सीखने को उत्सुक रहते हैं।



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