मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में बुधवार शाम को सड़क सुरक्षा के संबंध में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक हुई। मुख्यमंत्री ने लखीमपुर खीरी, अमरोहा, आगरा और अलीगढ़ जैसी जगहों पर हुए हालिया सड़क हादसों पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि दुर्घटनाओं में होने वाली मौतें देश और राज्य की अपूरणीय क्षति हैं। उन्होंने साफ तौर पर निर्देश दिया कि सड़कों पर स्टंटबाजी, ओवर स्पीडिंग और शराब पीकर गाड़ी चलाना किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है और ऐसा करने वालों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही, हादसों को रोकने के लिए ‘टॉप टू बॉटम’ सभी अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी और शासन स्तर पर हर 15 दिन में इसकी प्रगति की समीक्षा होगी।
मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन और परिवहन विभाग को निर्देशित किया कि सड़कों से अवैध स्टैंड तुरंत हटाए जाएं और सड़क किनारे होने वाली बेतरतीब पार्किंग पर पूरी तरह रोक लगाई जाए। स्कूली बच्चों की सुरक्षा को सर्वोपरि बताते हुए उन्होंने कहा कि बिना फिटनेस के कोई भी स्कूल वाहन सड़क पर नहीं उतरना चाहिए और बार-बार चालान होने वाले वाहनों के परमिट निरस्त किए जाएं। लोक निर्माण विभाग को प्रदेश की सड़कों के ‘ब्लैक स्पॉट’ चिह्नित कर उन्हें समय सीमा के भीतर ठीक करने, साइनेज लगाने और टेबलटॉप स्पीड ब्रेकर बनाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही हाईवे और एक्सप्रेसवे पर नियमित पेट्रोलिंग के साथ-साथ एंबुलेंस और नजदीकी अस्पतालों में इलाज के पुख्ता इंतजाम करने को कहा गया है ताकि घायलों को समय पर उपचार मिल सके।
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि उत्तर प्रदेश देश का एकमात्र राज्य है, जहां सभी 75 जिलों के 487 क्रिटिकल पुलिस थानों पर ‘जीरो फैटिलिटी डिस्ट्रिक्ट योजना’ लागू की गई है। सड़क सुरक्षा कोष के जरिए जिलों को 25 चार पहिया इंटरसेप्टर, 62 दोपहिया इंटरसेप्टर और 82 स्पीड लेजर गन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इन समन्वित प्रयासों और मुस्तैद कॉरिडोर टीमों के कारण पिछले चार महीनों में 566 लोगों की जान बचाई जा चुकी है। इसके अलावा, जनवरी 2026 से अप्रैल 2026 के बीच हुई सड़क दुर्घटनाओं में 21 प्रतिशत और सड़क हादसों में जान गंवाने वालों की संख्या में 22 प्रतिशत की बड़ी कमी दर्ज की गई है।