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सुना है क्या/suna hai kya
– फोटो : अमर उजाला
विस्तार
यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में ‘आईफोन लाइए, दीवाली मनाइए’ की कहानी। इसके अलावा ‘चर्चा में आ गई नेताजी की परीक्षा’ और ‘किस्सा कुर्सी का…’ के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी…
आईफोन लाइए, दिवाली मनाइए
वैसे तो त्योहारों पर तमाम तरह के ऑफर आते हैं, लेकिन राजस्व जुटाने वाले एक महकमे के फील्ड अधिकारियों को मुख्यालय वाले नायब साहब ने नायाब ऑफर दिया है। नायब साहब ने फील्ड में तैनात अफसरों को दिवाली गिफ्ट के तौर पर हाल में लांच आईफोन 18 प्रो भी लाने को कहा गया है। साथ में यह ऑफर दिया गया है कि जो आईफोन लाएगा, वही मालदार विंग में दिवाली मनाएगा। चर्चा है कि नायब ने करीब 40-50 मातहतों को आईफोन लाने का मैसेज दिया था और अब तक 25-30 तो साहब के पास पहुंच भी गए हैं। साहब ने यह बेशकीमती फोन ऊपर वालों को देने के नाम पर मंगाया था, लेकिन उनके घर वाले व मित्र उठा ले गए तो इसमें साहब को दोष देना उनकी निष्ठा के साथ बेमानी होगी।
चर्चा में आ गई नेताजी की परीक्षा
देश की सर्वोच्च अदालत ने शिक्षकों के लिए एक परीक्षा अनिवार्य कर दी। इसे लेकर शिक्षक लंबे समय से आंदोलनरत हैं। इसमें प्रदेश में शिक्षकों के अगुआ काफी चर्चा में रहे। सर्वोच्च अदालत में अर्जी लगाने से लेकर प्रदेश में विरोध भी किया। अंत में मामला न बनता देख उन्होंने विशेष परीक्षा की मांग भी कर डाली। अब जब विशेष परीक्षा हुई तो नेताजी भी पर्चा देने पहुंचे। कठिन पर्चा देख नेताजी बहुत तमतमाए हुए बाहर निकले। इस पर किसी ने चुटकी लेते हुए कहा कि आप ही तो विशेष परीक्षा की मांग करने गए थे, अब दीजिए परीक्षा। नेताजी खासे परेशान हैं कि उनके परीक्षा देने की जानकारी कहां से लीक हो गई।
किस्सा कुर्सी का…
सूब की एक बड़ी खेल संगठन में मुखिया के पद छोड़ने की चर्चा इन दिनों आम हो चली है। उनकी जगह कौन बैठेगा, को लेकर सरगर्मियां तेज है। उम्र के 73 बसंत देख चुके साहब पूरी तरह से रिटायरमेंट के मूड में आ चुके हैं। उनका साफ तौर पर कहना है कि 50 साल खेलों से जुड़े रहने के बाद अब पुराने वाली बात नहीं रह गई है। इसलिए अपनी जगह किसी उपयुक्त दावेदार को अपनी कुर्सी पर बैठे हुए देखना चाहता हूं। साहब की इच्छा के बाद उनकी जगह लेने वालों की होड़ मच गई है। अब साहब के सामने नई मुश्किल खड़ी हो गई है कि इस पद के लिए असली उपयुक्त दावेदार का चयन कैसे किया जाए।

