कुठोंदा (जालौन)
रविवार को ग्राम कुरसेंडा में राज राजेश्वरी महामाई बड़ी माता मंदिर के पावन स्थान पर श्री 1008 महामंडलेश्वर यज्ञपीठाधीश्वर श्री दूधाधारी जी महाराज के अध्यक्षता में आयोजित 403 वाँ 5 कुण्डीय श्रीराम महायज्ञ सात दिवसीय श्रीमद भागवत की कथा के समापन दिवस के अवसर पर कथावाचक बाल व्यास श्री प्रीतमदास महाराज ने दिव्य कथा श्रवण कराते हुए कहा कि इत्र कितना महंगा क्यों न हो ज़्यादा दिन नहीं महक सकता है इसीलिये इत्र से वस्त्र महकाने की बजाय विचार से चरित्र महकाओ जीवन में काम तो सदैव लगे ही रहने है इसीलिए तन से संसारी रहो मन से वैरागी हो जाओ और ज़्यादा से ज़्यादा सत्संग में समय व्यतीत करो क्यूंकि जो समय शेष है बस वही विशेष है समय जो निकल जाता है वो लौट कर नहीं आता इसीलिए बीते समय के पछतावे को भूल कर आगे जीवन को भजन सत्कर्म के द्वारा सुंदर बनाने का प्रयास करो आगें कथा में महाराज जी ने बताया कि भगवान उज्जैन में गुरु संदीपन जी के आश्रम में विद्या अध्ययन के लिए पहुंचे बहुत ही कम समय में विद्या अध्ययन पूर्ण किया यही पर सुदामा जी महाराज से भगवान की मित्रता हुई इधर गोपियों का इंतेजार बढ़ने लगा लेकिन प्रभु उद्धव जी को वृंदावन भेजते है वृंदावन में उद्धव जी संदेश लेकर कुछ समय के लिए आए थे लेकिन स्थिति ये बन गई छ: महीने होने को आये तब होश आया ब्रिज की रज में लोट रहे श्री श्री राधा कहते हुए भगवान के पास कहते हैं हमारा अगला जन्म हो तो वृंदावन की घास बनाना जिससे तुम्हारे भक्तों के चरणों से कुचल कर हमारा जीवन धन्य हो जाए भगवान ने मुच्छुकुंद जी के द्वारा काल्यवन को भस्म करवाया जरासंध को सत्रह बार हराया अठारहवीं बार जब जरासंध ने पूरी मथुरा को चारों तरह से घेर लिया तो भगवान मथुरावासियों को विश्वकर्मा के द्वारा समुद्र टापू पर स्थित द्वारिका पुरी में प्रवेश करा देते हैं बलराम जी का विवाह रेवती जी के साथ संपन्न हुआ भगवान के सोलह हजार एक सौ आठ व्याह हुए भगवान द्वारिकाधीश के आठ बिवाह तो अलग अलग हुए लेकिन सोलह हजार सौ विवाह एक साथ सम्पन्न हुए प्रागज्योतिषपुर में भौमासुर नाम का एक दैत्य रहता था इसने एक संकल्प लिया था कि बीस हजार कन्याओं के साथ विवाह करूँ जिससे हमारा नाम भी इतिहास में अंकित हो जाये ये दैत्य राजाओं से युद्ध करता युद्ध में राजाओं को हरा कर मार उनके राजकुमारियों को अपने साथ ले आता और जेल में बंद कर देता था भगवान को इस बात की जानकारी हुई भगवान ने प्रागज्योतिषपुर में सत्यभामा जी के साथ जाकर भौमासुर से युद्ध किया और भौमासुर को मारकर उनकी जेल में जो सोलह हजार सौ कन्या थी उन्हें क़ैद से मुक्त किया लेकिन उन्होंने भगवान से प्रार्थना की प्रभु ये बो भूमि है जिसने परम पवित्र माँ जगत जननी जानकी पर कितने आरोप लगाये उन्हें अग्नि परीक्षा देनी पड़ी तो इतने समय भौमासुर के क़ैद में रहने के बाद कोई भी राजकुमार हमे स्वीकार नहीं करेगा इसीलिए हमारे पास दो ही रास्ते हैं या तो आप हमे स्वीकार करो वर्ना हमारा मर जाना ही उचित है भगवान ने कहा जिसके लिए जमाने के सारे रास्ते बंद हो जाते हैं उसके लिए हमारा रास्ता सदैव खुला रहता है तो भगवान द्वारिकाधीश ने उन कन्याओं के साथ विवाह संपन्न किए प्रत्येक पत्नी से 10 पुत्र एवं एक कन्या का जन्म हुआ महाराज ने कहा बेटियों की बहुत महिमा है जो फल दस पुत्र के लालन पालन से मिलता है वो एक बेटी के लालन पालन से प्राप्त होता है बेटियां सौभाग्य से प्राप्त होती है बेटे स्वाभिमान है तो बेटियां प्राण है भगवान भिखारियों के यहा बेटियां नहीं देते जिनका कलेजा कन्यादान का होता है उन्हें बेटी प्रदान करते है बेटे एक कुल का नाम रोशन करते हैं तो बेटियां दो कुल को आगे बढ़ाती हैं भगवान बड़े ही कृपालु हैं सुदामा चरित्र की कथा कहते हुए कहा सबसे बड़ा निर्धन वो जिसके पास संतुष्टि नहीं है भगवान दीनबंधु है जो हर समय हर परिस्थिति में भगवान को भजते हैं उनका ध्यान करते हैं कोई शिकायत नहीं करते वही भगवान को सबसे प्रिय है सुदामा जी महाराज भगवान से कभी शिकायत नहीं करते थे मित्रता हो तो सुदामा जी महाराज की तरह भगवान ने अपने ही जैसा सर्वस्य प्रदान कर दिया आगे कथा समापन में कहा कि भगवान अनासक्त है उन्हें किसी से कोई आसक्ति नहीं है जो जैसा कर्म करता है उसे वैसा ही फल देते हैं चाहे जो भी हो आगे कथा में कलियुग का वर्णन भी व्यास जी ने किया कि कलियुग की आयु चार लाख बत्तीस हजार वर्ष है भगवान का कल्कि अवतार विष्णुयश नाम के विप्र देवता के यहाँ होगा मरु देवापी नाम के राजा तपस्या में लीन है भगवान उन्हें जगाकर उनके साथ पापियों का वध करेंगे धर्म की स्थापना करके भगवान बैकुंठ चले जाएँगे तभी से सतयुग प्रारम्भ हो जाएगा श्रोता जन बड़े ही आनंदित उत्साहित प्रसन्न होकर कथा सुन रहे थे बड़ी माता के पावन स्थान पर दिव्य आयोजन का समापन हुआ विदाई वेला के समय श्रद्धालु भावुक हो गए ग्रामवासी क्षेत्रवासी सब बड़े भाव से सेवा में लगे रहे
इस अवसर पर श्रद्धालु बड़े आनंदित प्रसन्न होकर जय श्री राधे की उद्घोष करने लगे
इस अवसर पर कथा परीक्षित श्री प्रशान्त सिंह सेंगर जी की माताजी यज्ञपति जी बड़े हर्ष से आयोजन का आनंद ले रहे महामंडलेश्वर यज्ञपीठाधीश्वर श्री दूधाधारी महाराज जी यज्ञाचार्य अमन दुबे लोई आचार्य अतुल मिश्रा मलुपुरा आचार्य रोहित मिश्रा आचार्य सुभाष जी आचार्य रिंकू जी ऑर्गन पर मंगल रूरा ढोलक पर रामशंकर राजावत हनुमानदास बाबा गाजीपुर लोचन दास सहित भारी हजारों की संख्या में भक्तजन उपस्थित रहे कथा में आने वाले श्रोताओं भक्तों संतों के लिए बड़ी उत्तम व्यवस्था की गई
श्री दूधाधारी महाराज जी के द्वारा अन्नक्षेत्र की व्यवस्था की गई एवं श्रद्धालुओं ने खूब भंडारा प्रसाद ग्रहण किया
