अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह

Updated Sun, 06 Sep 2026 06:40 PM IST

Allahabad High Court : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति को लेकर अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि स्वीकृत पद पर हुई मृतक आश्रित की नियुक्ति को पूरी तरह अस्थायी नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने नियुक्ति पत्र में बिना कारण बताए एक माह के नोटिस पर कर्मचारी को हटाने की शर्त को कानून के सिद्धांतों के विपरीत माना है।


High Court: Compassionate appointment is against a regular post; condition for removal on one month notice i

इलाहाबाद हाईकोर्ट।
– फोटो : अमर उजाला ग्राफिक।



विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए जारी नियुक्ति पत्र में कर्मचारी को एक माह के नोटिस पर बिना कारण हटाने की शर्त को गलत ठहराया है। कोर्ट ने कहा कि मृतक आश्रित नियमों के तहत की जाने वाली नियुक्ति स्वीकृत पद के विरुद्ध होती है। ऐसे में नियुक्ति को पूर्णतः अस्थायी बताने वाली शर्त कानून के तय सिद्धांतों के विपरीत है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकलपीठ ने सपना सारस्वत की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याची के भाई की एसएन मेडिकल कॉलेज एवं चिकित्सालय में सेवाकाल के दौरान नियुक्ति हो गई थी। याची ने मृतक आश्रित के तहत नियुक्ति के लिए आवेदन किया था। पिता के सेवानिवृत्त होकर पेंशन लेने के आधार पर याची के आवेदन को खारिज कर दिया था। याची ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी।




प्राचार्य बोले- वापस लिया जा चुका है आदेश



कोर्ट के 13 अगस्त के आदेश के अनुपालन में मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य उपस्थित हुए और अपना व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल किया। बताया गया कि पूर्व आदेश वापस लिया जा चुका है और याची को 27 अगस्त को नियुक्ति पत्र जारी कर दिया गया है। हालांकि, याची के अधिवक्ता कमल केसरवानी  ने नियुक्ति पत्र की पहली शर्त पर आपत्ति जताई। इसमें लिखा था कि नियुक्ति पूर्णतः अस्थायी है और बिना कोई कारण बताए किसी भी समय एक माह के नोटिस पर समाप्त की जा सकती है। कोर्ट ने इस शर्त को स्वीकार करने से इन्कार करते हुए कहा कि अनुकंपा नियुक्ति स्वीकृत पद के विरुद्ध होती है। इसलिए नियुक्ति पत्र में ऐसी शर्त शामिल किए जाने का कोई औचित्य नहीं है।



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