समस्याओं के समाधान के लिए नगर निगम ने मोहल्ला समाधान शिविर लगाए, लेकिन पहले से सूचना न होने के कारण लोग ही नहीं पहुंचे। बृहस्पतिवार रात को अचानक वार्डों के नाम तय किए गए, जहां मोहल्ला समाधान शिविर लगाए जाने थे। ऐसे में पार्षदों के साथ ही लोगों को भी शिविर की जानकारी नहीं हो सकी। शुक्रवार को नूरी दरवाजा में चार, नवलगंज में पांच और बाग फरजाना में छह लोग ही शिकायत लेकर पहुंचे। नूरी दरवाजा में लगे शिविर में नगर निगम के 14 अधिकारी और कर्मचारी मौजूद थे, जो सुबह 8 से दोपहर 12 बजे तक फरियादियों का इंतजार करते रहे। चार घंटे तक कुर्सियां खाली पड़ी रहीं। पार्षदों ने निगम की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं।
दो सप्ताह के बाद नगर निगम ने चार जोन के आठ वार्डों में मोहल्ला समाधान शिविर लगाए। इनकी सूचना पहले बुधवार को ही दे दी जाती थी, जिससे पार्षद और क्षेत्र के लोग स्ट्रीट लाइट, सफाई, पानी, सड़क, गृहकर आदि की शिकायतें लेकर पहुंचते थे। इस बार लोगों को सूचना ही नहीं मिल पाई। लापरवाही और खराब तालमेल के कारण समाधान शिविर का लाभ लोगों को नहीं मिला। वार्डों में मेज-कुर्सी लगाकर बैठे नगर निगम के अधिकारी इंतजार करते रहे।
आठ वार्डों में आईं 167 शिकायतें
नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक आठ वार्डों में कुल 167 शिकायतें आईं। इनमें नूरी दरवाजा में 4, नवलगंज में 5, बाग फरजाना में 6, शहीद नगर में 17, अशोक नगर में 22, केदार नगर में 34 और बालूगंज में 43 शिकायतें आईं। छत्ता जोन में 54,261 रुपये गृहकर जमा हुआ है। नगर आयुक्त संतोष कुमार वैश्य के मुताबिक नगर निगम मुख्यालय के चक्कर लोग न लगाएं, इसलिए उनके वार्डों में ही शिविर लगाए जा रहे हैं। शिकायतों का रिकॉर्ड बना रहे हैं, जिससे जल्द निस्तारण हो सके।
ऐसे शिविर लगाने से बेहतर है कि इन्हें बंद कर दिया जाए। केवल सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग हो रहा है। प्रचार-प्रसार के बिना शिविर का कोई औचित्य नहीं है। पहले के लगे शिविरों में कितनी शिकायतें निपटाई गईं, इसका ब्योरा भी नगर आयुक्त को देना चाहिए। -शरद चौहान, पार्षद, बाग फरजाना
मुझे रात 10 बजे अचानक सूचना दी गई। क्षेत्र में जलभराव, सड़क, सफाई, स्ट्रीट लाइटों की समस्या है, पर सूचना ही नहीं थी तो लोग कैसे आते। नगर आयुक्त और मेयर लापरवाही के जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करें। ये शिविर छलावा बनकर रह गए हैं। -प्रवीन पटेल, पार्षद, नूरी दरवाजा
