आगरा। लखनऊ में स्वाइन फ्लू से मौत के बाद एसएन मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में संदिग्ध मरीजों की स्क्रीनिंग की जा रही है। बुखार ठीक न होने और सांस उखड़ने वाले मरीजों के नमूनों की जांच भी हो रही है। केस हिस्ट्री भी ली जा रही है। दवाएं देने के साथ बचाव के लिए भी जागरूक कर रहे हैं।
मेडिसिन विभाग के डॉ. चंद्रप्रकाश गौतम ने बताया कि मौसम बदलने पर वायरल फीवर के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। ओपीडी में आने वाले औसतन 650 मरीजों में से 70 फीसदी में ये परेशानी मिल रही है। दिल्ली-लखनऊ में स्वाइन फ्लू के मरीज मिलने के बाद स्क्रीनिंग भी कर रहे हैं। इसमें तेज बुखार ठीक नहीं होने, छाती में दर्द होने, सांस लेने में परेशानी होने और दिल्ली की यात्रा करने समेत अन्य की जानकारी कर इनकी जांच भी करा रहे हैं।
इन लक्षणों के साथ मधुमेह, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप की परेशानी है तो उनके भी नमूने लैब भेज रहे हैं। राहत की बात है कि अब तक किसी में पुष्टि नहीं हुई है। बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. पंकज कुमार ने बताया कि बच्चों में बुखार-खांसी, जुकाम, पेट में दर्द, उल्टी-दस्त के साथ पीलिया के मरीजों की संख्या अधिक हैं। निमोनिया के भी मरीज आने लगे हैं। पसली चलने समेत बुखार में आराम नहीं मिलने पर बच्चों की स्क्रीनिंग करा रहे हैं।
दो से तीन दिन में दूसरों पर भी असर
– इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. संजीव अग्रवाल ने बताया कि बाल रोग विशेषज्ञों के पास आ रहे मरीजों में 70-80 फीसदी को वायरल फीवर मिल रहा है। गले में खराश, दर्द, बुखार से बच्चा सो नहीं पा रहा। भूख भी प्रभावित हो रही है। इससे चिड़चिड़ापन भी हो रहा है। बुखार आने के दो-तीन दिन बाद इलाज के लिए ला रहे हैं, दो से तीन दिन में घर के अन्य सदस्य भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।
इन बातों का रखें ध्यान
– जुकाम-खांसी, बुखार होने पर मास्क लगाएं।
– मुंह पर रुमाल रखकर छींकें और खांसें।
– बेवजह भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचें।
– दूषित हाथों को मुंह-आंख से न लगाएं, साफ करें।
