Sharad Purnima: The lovely maiden has turned her face away from us...

बाह: जरार में टेसू-झांझी का विवाह

बाह। अंगना बोली कोयल पिछवाड़े बोले मोर, चली है प्यारी झांझी हम सबसे मुखड़ा मोड़….. सोमवार की रात बाह, जैतपुर के गांव कस्बों में ठीक इसी अंदाज में झांझी की विदाई हुई। दशहरा से शुरू हुई महाभारत कालीन लोक परंपरा का उत्सव सोमवार को दूसरे दिन बाह, जैतपुर, भदरौली, जरार, बिजौली, मंगदपुर, चित्राहाट, बासौनी, पुरा कनेरा, होलीपुरा, नंदगवा, कचौराघाट आदि गांव की गलियों में टेसू-झांझी के लोकगीत गूंजे। विवाह की रश्में निभाई गयी। उसके बाद विदाई हुई।


हिन्दू रीति रिवाज के मुताबिक जरार, जैतपुर, बिजौली, मंगदपुर में टेसू-झांझी का मंगलगीतों के बीच विवाह हुआ। सात फेरे पूरे होने से पहले ही टेसू का सिर धड़ से अलग कर दिया, इसके बाद तालाब में विसर्जित कर दिया। वहीं झांझी को पति वियोग में सती होने के लिए लड़कियां सर पर रखकर समूह में घूमी और जमीन पर गिरने से टूट कर बिखर गई। इसी के साथ लोक परंपरा संपन्न हो गयी। जरार की सावित्री, शिवानी, बाह की मिथलेश, सीमा, बिजौली की ममता, रेखा ने बताया कि महाभारत कालीन परंपरा के निर्वहन में बच्चों के साथ महिलाएं भी शामिल हुई। रीति रिवाज के साथ विवाह की रश्मों के साथ ही उनको बचपन के दिन याद आए बिना नहीं रहे।



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