राम मंदिर में रामलला को अर्पित किए जाने वाले भोग प्रसाद को जल्द ही खाद्य सुरक्षा स्टैंडर्ड अथारिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) की ओर से शुद्धता का प्रमाण पत्र प्रदान किए जाने की तैयारी है। इस शुद्धता के प्रमाण पत्र को ”भोग” कहा जाता है। इसके लिए राम मंदिर के रसोइयाें व कोठारियों को खाद्य सुरक्षा, स्वच्छता व गुणवत्ता मानकों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

अगले माह एफएसएसएआई (भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण) की ऑडिट टीम राम मंदिर पहुंचेगी। यहां प्रसाद निर्माण, रसोई व्यवस्था, खाद्य सामग्री की गुणवत्ता, जल की शुद्धता, स्वच्छता व्यवस्था, और कर्मचारियों के स्वास्थ्य मानकों की जांच की जाएगी। सभी मानक पूरे होने पर मंदिर को ”भोग” प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा। खाद्य सुरक्षा विभाग के सहायक आयुक्त मानिक चंद बताते हैं कि एफएसएसएआई उन पूजा स्थलों को ”भोग” प्रमाणपत्र प्रदान करता है, जो खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता के पूर्व-निर्धारित मानदंडों को पूरा करते हैं।

इसके तहत, प्रसाद तैयार करने वाले रसोई कर्मचारियों और विक्रेताओं को भोजन सुरक्षा और स्वच्छता के बारे में प्रशिक्षित किया जाता है। इसी उद्देश्य से रसोइया के स्टॉफ की मेडिकल जांच की जा रही है। भोजन बनाने में उपयोग होने वाली पानी की गुणवत्ता, पैक्ड़ खाद्य सामग्री की जांच, प्रसाद अर्पण की विधि तक का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

यह है ”भोग” प्रमाणपत्र

– ”भोग” (ब्लिसफुल हाइजीनिक ऑफरिंग टू गॉड) एफएसएसएआई की एक अनूठी पहल है। इस पहल का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि भगवान को अर्पित किया जाने वाला और श्रद्धालुओं को मिलने वाला प्रसाद स्वच्छ, पौष्टिक और सुरक्षित हो। यह परियोजना ”ईट राइट इंडिया” अभियान का एक हिस्सा है, जो सही भोजन की आदतों को बढ़ावा देता है। इसका उद्देश्य धार्मिक स्थलों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलाना है, ताकि प्रसाद से कोई अशुद्धि या रोग न फैले।



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