इन दिनों सोशल मीडिया पर कॉकरोच खूब चर्चा में है। कॉकरोचों के आतंक से पहले ही तराई क्षेत्र जूझ रहा है। बेमौसम बारिश के बाद बेतहाशा गर्मी से इनका प्रकोप और बढ़ने की आशंका है। विशेषज्ञ के मुताबिक, बढ़ी उसम और नमी कॉकरोचों के लिए अनुकूल है। सालाना पांच करोड़ रुपये तक सिमटता कीट नियंत्रण कारोबार बढ़ने के आसार हैं।
कीट विशेषज्ञ अभिषेक के मुताबिक, अधिक तापमान में कॉकरोच का मेटाबॉलिज्म और प्रजनन चक्र बढ़ता है। इसलिए गर्मी और मानसून में कॉकरोच की संख्या अचानक बढ़ जाती है। मार्च-अप्रैल के दौरान अधिकतम तापमान 25 से 35 डिग्री के बीच होता है। तब कॉकरोच की तादाद बढ़ती है।
भीषण गर्मी में बाहर निकल जाते हैं कॉकरोच
मई-जून में भीषण गर्मी से छिपे स्थानों से कॉकरोच बाहर निकल आते हैं। जुलाई से सितंबर तक बारिश के दौरान मच्छर बढ़ते हैं तो ये नमी स्थान पर छिप जाते हैं। फिर अक्तूबर, नवंबर में कॉकरोच की तादाद, संक्रमण और दिखाई देने की घटना में सामान्य दिनों से करीब 30 से ज्यादा की बढ़त दर्ज होती है।
उन्होंने बताया कि कॉकरोच तेजी से फैलने वाले जिद्दी कीट हैं। नाली, पाइपलाइन, सीवर, दीवार की दरार से घर और दुकान में पहुंचते हैं। रसोई में बचा भोजन, गंदगी, नमी, बंद स्थान इनके लिए आदर्श माहौल बनाते हैं। मौसम के तेवर कॉकरोचों के अनुकूल होने से कीट नियंत्रण कारोबार बढ़ेगा।
