झांसी। रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने किसानों को मसालों के बीज का भंडारण करते समय वैज्ञानिक तरीके अपनाने की सलाह दी।
औषधीय एवं पादप विभाग के वैज्ञानिक डॉ. उमेश पंकज और डॉ. बृज बिहारी शर्मा ने बताया कि धनिया, सौंफ और मेंथी आदि नकदी फसलें हैं। कटाई के बाद लापरवाही से इनकी गुणवत्ता और कीमत दोनों प्रभावित होती है। फसल काटने के तुरंत बाद मड़ाई न करें। पहले 3-4 दिनों तक धूप में अच्छी तरह सुखाएं। इसके बाद मड़ाई कर दानों को साफ करें और फिर से धूप में सुखाएं। अधिक नमी से उपज खराब होने का खतरा रहता है।
सूखे दानों को साफ-सुथरे, सूखे और हवादार स्थान पर रखें। नमी से बचाने के लिए जूट या प्लास्टिक के बैग का इस्तेमाल करना चाहिए। इसे जमीन के बजाय लकड़ी के तख्तों पर रखें। नियमित रूप से इसकी जांच भी करते रहें। यदि कहीं कीट या फफूंद का असर दिख जाए तो संक्रमित हिस्से को तुरंत अलग कर दें।
