
संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। जिला महिला अस्पताल में ड्यूटी पर तैनाती के बाद भी महिला डॉक्टर घर पर आराम करती रहीं। कई बार फोन करने के बाद भी डॉक्टर तीन साल की मासूम दुष्कर्म पीड़िता का इलाज करने अस्पताल नहीं पहुंची। जिससे लगभग आठ घंटे बाद मासूम का इलाज शुरू हो सका। जिलाधिकारी के दखल के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने तीन सदस्यीय टीम का गठन कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
14 अगस्त को सदर थाना इलाके में तीन वर्ष की मासूम को दुष्कर्म के बाद नाले में फेंक दिया गया था। परिजनों के तलाशने के बाद मासूम बेसुध हालत में मिली थी। सदर बाजार पुलिस आरोपी को हिरासत में लेकर मासूम का इलाज और मेडिकल कराने के लिए रात तकरीबन एक बजे जिला महिला अस्पताल पहुंची थी। ड्यूटी डॉक्टर वहां नहीं थी, जिस पर कर्मचारियों ने डॉक्टर को फोन लगाकर मामले की जानकारी दी। इसके बाद भी मासूम का इलाज करने के लिए डॉक्टर नहीं पहुंची। परेशान होकर पुलिस कर्मी और परिजन रात में सीएमओ के आवास पर पहुंचे। लम्बी जद्दोजहद के बाद सुबह करीब सात बजे के बाद मासूम का इलाज शुरू हो सका था। मामला जिलाधिकारी अविनाश कुमार के संज्ञान में आते ही स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने तीन सदस्यीय टीम का गठन कर मामले की पड़ताल शुरू कर दी है। जांच टीम में एसीएमओ डॉ. एनके जैन, एसीएमओ डॉ. रवि शंकर व डॉ. प्रियंका चौधरी ने मौजूद कर्मचारियों के बयान दर्ज किए। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. राजनारायण ने बताया कि तीन साल की दुष्कर्म पीड़िता के इलाज और मेडिकल में लापरवाही का मामले में जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
