चकरनगर। सीएचसी राजपुर में करीब आठ लाख रुपये कीमत की एक्स-रे मशीन पिछले आठ साल से ताले में बंद पड़ी है। मशीन होने के बावजूद क्षेत्र के 105 गांवों की करीब दो लाख आबादी को एक्स-रे जांच के लिए 50 से 60 किलोमीटर दूर जिला अस्पताल अथवा मध्य प्रदेश के भिंड जिले तक दौड़ लगानी पड़ रही है। स्वास्थ्य विभाग की इस लापरवाही से मरीजों को परेशानी भी उठानी पड़ रही है।
सीएचसी राजपुर में प्रतिदिन हड्डी संबंधी चोट और अन्य बीमारियों से पीड़ित 30 से अधिक मरीज एक्स-रे कराने पहुंचते हैं। मशीन बंद होने के कारण मरीजों को निजी पैथोलॉजी सेंटरों का सहारा लेना पड़ता है, जहां 500 से 800 रुपये तक एक्स-रे के लिए खर्च करने पड़ते हैं। दूर-दराज के गांवों से आने वाले मरीजों को किराये के रूप में अतिरिक्त पैसा खर्च करना पड़ता है। कोला निवासी सोनू बाथम ने बताया कि दस दिन पहले पैर फिसलने से चोट लग गई थी। पैर में सूजन होने पर सीएचसी राजपुर पहुंचे तो पता चला कि एक्स-रे नहीं हो रहा है। मजबूरी में भिंड जाना पड़ा। वहां 400 रुपये में एक्स-रे हुआ, जबकि आने-जाने में करीब 1500 रुपये गाड़ी का किराया लग गया। सिरसा निवासी बबली ने बताया कि खेत पर गिरने से पैर में चोट लग गई थी। चकरनगर क्षेत्र में न तो एक्स-रे की सुविधा चालू है और न ही हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉक्टर की तैनाती है। मजबूरी में ग्रामीण आज भी बैद्य के पास जाने को विवश हैं, जहां अंदाजे के आधार पर उपचार किया जाता है।
एक्स-रे मशीन पुरानी हो चुकी है। इसकी फिल्म और जरूरी सामान उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। डिजिटल एक्स-रे मशीन की मांग स्वास्थ्य विभाग से की गई है। अगले सप्ताह तक नई मशीन मिलने की उम्मीद है।
महेशपाल सिंह, सीएचसी अधीक्षक चकरनगर
