बकेवर। महेवा ब्लॉक क्षेत्र में पिछले 20 दिन से हो रही बारिश और जलभराव के कारण लगभग तीन हजार हेक्टेयर बाजरे की फसल खराब हो गई है। इससे किसानों को हजारों का नुकसान हुआ है। शासन प्रशासन के बाजरे का रकबा बढ़ाने के प्रयासों के बावजूद, बारिश से यह रकबा काफी कम रह गया है।
बकेवर लखना क्षेत्र में लगातार बारिश से धान को फायदा हुआ, पर बाजरे को भारी हानि हुई। कई किसानों के बीज पहले ही खराब हो गए थे, जिसके बाद उन्होंने दोबारा बोआई की। लेकिन खेतों में पानी भर जाने से दोबारा बोई गई फसल भी नहीं उग पाई। कुछ खेतों में बाजरा बोआई के तुरंत बाद नष्ट हो गया, जबकि अन्य में उगने के बाद सड़ गया। महेवा ब्लॉक में धान और बाजरा खरीफ की मुख्य फसलें हैं, खासकर उन क्षेत्रों में जहां सिंचाई के साधन नहीं हैं। इस साल कई किसानों ने धान की जगह बाजरा बोया था, लेकिन बारिश ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। अब ये खेत खाली पड़े हैं और दोबारा बोआई संभव नहीं दिख रही है। एडीओ कृषि हर्ष कुमार ने बताया कि ब्लॉक में बाजरा का आच्छादित रकबा करीब सात हजार हेक्टेयर था। उन्होंने अनुमान लगाया कि लगभग तीन हजार हेक्टेयर बाजरा की फसल बारिश से खराब हुई है।
कुड़रिया निवासी किसान छंगे ठाकुर ने बताया कि उन्होंने तीन बीघा में बाजरा बोया था। फसल उगते ही कई दिनों तक बारिश होने से वह नष्ट हो गई। उनकी जोताई, बोआई और बीज की लागत भी बर्बाद हो गई। अब दोबारा बोआई करना संभव नहीं है।
नसीदीपुर के रामनरायन और अनिल चौहान ने बताया कि उनका दस बीघा बाजरा पानी में नष्ट हो गया। हर्राजपुर के सुधीर कुमार ऋषीश्वर ने 20 बीघा और रामशेष ने नौ बीघा बाजरा बोया था। बारिश के कारण उनकी फसल भी नष्ट हो गई और लागत बर्बाद हो गई। मड़ौली निवासी नितिन चतुर्वेदी की दस बीघा बाजरा और सब्जी की फसल भी पानी भरने से खराब हो गई।
