चकरनगर (इटावा)। गढ़ाकासदा गांव में फैली बीमारी और लगातार चार बच्चों की मौत के बाद जिला प्रशासन सक्रिय हुआ। सैफई आयुर्विज्ञान विवि की विशेषज्ञों की एक टीम सोमवार को गांव पहुंची। टीम ने मृतक बच्चों के घर समेत बीमार लोगों के घर जाकर जानकारी जुटाई।
विशेषज्ञों के दल में प्रोफेसर कम्युनिटी मेडिसिन विशेषज्ञ धीरज श्रीवास्तव और एसोसिएट प्रोफेसर पीडियाट्रिक्स दुष्यंत रस्तोगी शामिल थे। उनके साथ जिला मलेरिया अधिकारी एसएन सिंह ने भी गांव का दौरा किया। टीम ने घर-घर जाकर 20 से 25 बीमार बच्चों और महिलाओं को देखा। उन्होंने मृतक बच्चों के परिजनों से बीमारी के दौरान सामने आए लक्षणों की जानकारी ली। मरीजों से पेट दर्द, उल्टी में खून आना, शरीर पर दाग और शौच में खून आने जैसे लक्षणों के बारे में बारीकी से पूछताछ की गई।
बुखार से पीड़ित 10 संदिग्ध बच्चों के खून के नमूने लिए गए हैं। इन नमूनों की सैफई आयुर्विज्ञान विवि में उच्च गुणवत्ता वाली मशीनों पर जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद गांव में फैली बीमारी का वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकेगा।
टीम ने इन बीमार बच्चों को देखा
सैफई आयुर्विज्ञान विवि की टीम ने गढ़ाकासदा में बीमार व लोगों को देखा। इसमें वीरू (14), हिमांशी (14), रोशनी (15) सूरज सिंह, प्रतीक्षा (13) प्रेमनारायण, अनुपम (15), प्रियंका (16), पलक (8) कार्तिक (6), अंशिका (12) , महेंद्र सिंह (11), प्रतीक्षा, (7), श्रद्धा (5), शांति देवी (30) आदि मरीजों को देखा।
चार मरीजों की प्लेटलेट्स कम मिलने पर किया गया रेफर, नहीं गए मरीज
सीएचसी अधीक्षक महेश पाल ने बताया कि रविवार को 36 बच्चों के सीबीसी जांच के लिए रक्त नमूने लिए गए थे। इनमें रूपेंद्र, छोटी बेटी, रोशनी और रामकेशरी पत्नी रामजीवन की प्लेटलेट्स कम मिली थीं। चारों को जिला अस्पताल रेफर किया गया था, लेकिन कोई भी मरीज जिला अस्पताल नहीं गया। वह लोग निजी अस्पताल में इलाज करवा रहे हैं।
18 दिनों में चार की मौत, 22 बच्चे बीमार
पिछले 18 दिनों में बीमारी की चपेट में आने से सतेंद्र, गुनगुन, किशन और साक्षी चार मासूमों की मौत हो चुकी है, जबकि 20 से 22 बच्चे अब भी बीमार हैं। लगातार बच्चों के बीमार होने और चार मौतों के बाद ग्रामीण समेत स्वास्थ्य विभाग परेशान है। वहीं, इतने दिन बीत जोन के बाद भी बीमारी और बच्चों की मौत के वास्तविक कारण का पता नहीं चल सका है। गांव में बीमारी को पता लगाने को सैफई की टीम जांच करने पहुंची है।
