इटावा। आलू के गिरते भाव ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मंडी में आलू की कीमत लागत से काफी कम है। आलू भंडारण शुल्क अनुदान योजना का लाभ भी उन्हें नहीं मिल पा रहा है। जिले में लगभग 80 हजार आलू किसान हैं, लेकिन योजना के तहत अब तक मात्र 800 किसानों ने ही आवेदन किया है। किराये और बटाई पर जमीन लेकर खेती करने वाले किसानों को राहत मिलने में पात्रता की शर्तें बाधा बन रही हैं।
जिले के 58 कोल्ड स्टोरों में इस बार 6,13,696 मीट्रिक टन आलू का भंडारण हुआ था। अब तक 2,27,067 मीट्रिक टन यानी करीब 37 फीसदी आलू की ही निकासी हो सकी है। अभी भी 3,86,629 मीट्रिक टन आलू कोल्ड स्टोरों में डंप है। पिछले वर्ष अगस्त तक लगभग 45 फीसदी आलू की निकासी हो चुकी थी। इस बार भाव काफी गिरने के कारण निकासी की रफ्तार धीमी हो गई है। किसान आलू निकालकर घाटा उठाने के बजाय भाव बढ़ने का इंतजार कर रहे हैं।
आलू भंडारण शुल्क अनुदान योजना के तहत निजी कोल्ड स्टोर में आलू भंडारण करने वालों को अनुदान मिलता है। किसानों को 100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भंडारण शुल्क में सहायता दी जाती है। एक किसान को अधिकतम 20 हजार रुपये तक की सहायता मिल सकती है, लेकिन इसका लाभ केवल उन्हीं किसानों को मिलता है जो अपनी निजी खेत पर आलू उगाते हैं। जिले में 50 फीसदी से अधिक आलू किसान बटाईदार हैं। ये किराये पर जमीन लेकर आलू का उत्पादन करते हैं। पात्रता की शर्तों को पूरा न कर पाने के कारण इन किसानों को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। किसानों की मांग है कि पात्रता की शर्तों को व्यावहारिक और आवेदन की व्यवस्था को सरल किया जाए।
जिले में पिछले वर्ष करीब 22 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में आलू की खेती हुई थी। इस बार किसानों ने बड़ी मात्रा में आलू का भंडारण कराया। जिले के 58 कोल्ड स्टोरों की कुल क्षमता 6,80,370 मीट्रिक टन है। इसके मुकाबले इस बार 6,13,696 मीट्रिक टन आलू का भंडारण हुआ, जो कुल क्षमता का करीब 90.2 फीसदी है। इतनी बड़ी मात्रा में आलू के डंप रहने से किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है।
योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के पोर्टल potato.uphorticulture.in पर पंजीकरण कराना होगा। योजना से संबंधित किसी भी तकनीकी समस्या व जानकारी के लिए किसान जिला उद्यान कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं। आवेदन के दौरान किसान को खसरा-खतौनी, आधार सीडेड मोबाइल नंबर, बैंक पासबुक या निरस्त चेक की प्रति देनी होगी। इसके साथ ही भंडारण की रसीद, निकासी और बिक्री की रसीदें भी अपलोड करनी होगी। कोल्ड स्टोर संचालक आवेदन की जांच कर इसे जिला उद्यान अधिकारी कार्यालय में भेजेगा, वहां से मंजूरी मिलने के बाद डीबीटी से रकम खाते में पहुंचेगी।
किसान राजेश यादव का कहना है कि भाव लागत के मुकाबले काफी कम है। ऐसे में कोल्ड स्टोर से आलू निकालकर बेचने पर लागत और भंडारण का खर्च भी पूरा नहीं हो पा रहा है। इसलिए फिलहाल भाव में सुधार की उम्मीद में आलू को स्टोर में ही रखना मजबूरी है। सरकार को किसानों को राहत देने के लिए ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए, जिससे कम कीमत के समय भी उन्हें नुकसान न उठाना पड़े।
किसान अनमोल चंद्र का कहना है कि कई किसान बटाई या किराये पर जमीन लेकर आलू की खेती करते हैं। फसल तैयार करने और कोल्ड स्टोर में रखने का पूरा खर्च भी उठाते हैं, लेकिन जमीन उनके नाम नहीं होने के कारण उन्हें कई योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता है। सरकार को बटाईदार किसानों के लिए अलग से सरल व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि वास्तविक रूप से खेती करने वाले किसानों को भी अनुदान मिल सके।
वर्जन
कोल्ड स्टोर में भंडारण के अनुदान शुल्क के लिए अब तक 800 किसानों ने आवेदन किया है। 20 से अधिक किसानों का भुगतान भी करवाया जा चुका है। योजना का लाभ अधिक से अधिक किसानों को मिले, इसके लिए लगातार प्रचार-प्रसार करवाया जा रहा है। योजना में बटाईदार और किराये पर खेती करने वाले किसानों के लिए कोई प्रावधान नहीं है। – श्याम सिंह, जिला उद्यान अधिकारी
