मुहम्मदाबाद। उरई-राठ मार्ग पर कुसमिलिया गांव में कंपोजिट विद्यालय के सामने जल निगम ग्रामीण की ओर से खोदे गए खुले गड्ढे में बाइक गिरने से दुकानदार की मौत हो गई। तीन दिन से सड़क किनारे दो बड़े गड्ढे खुले पड़े थे। न उनके आसपास बैरिकेडिंग की गई थी और न ही कोई संकेतक लगाया गया था। गड्ढों से निकली मिट्टी सड़क पर पड़ी होने से रास्ता भी संकरा हो गया था। पिता ने जल निगम ग्रामीण और नमामि गंगे परियोजना से जुड़े जिम्मेदारों के खिलाफ तहरीर दी है।
शहर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला इंदिरा नगर तुफैलपुरवा निवासी दुकानदार हिरदेश शाक्यवार (30) गांव-गांव लगने वाले मेलों और धार्मिक कार्यक्रमों में दुकान लगाकर परिवार का पालन-पोषण करते थे। विश्वकर्मा जयंती पर उन्होंने डकोर में दुकान लगाई थी। गुरुवार रात करीब 10:30 बजे वह बाइक से घर लौट रहे थे। कुसमिलिया में स्कूल के सामने सड़क किनारे खोदे गए गड्ढों के पास मिट्टी पड़ी होने से रास्ता संकरा था। इसी दौरान उनकी बाइक गड्ढे में जा गिरी। तेज आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे तो हिरदेश घायल पड़े थे। उनके सिर से काफी खून बह रहा था। एंबुलेंस पहुंचने से पहले ही उनकी मौत हो गई।
हिरदेश की मौत से परिवार में कोहराम मचा है। पिता विनोद शाक्यवार ने बताया कि बेटा ही परिवार का कमाने वाला था। उसके पीछे पत्नी सीमा और तीन छोटे बच्चे हैं। बड़ा बेटा चंदन (12), पहलाद (8) और बेटी गुड़िया (6) है। पत्नी सीमा का रो-रोकर बुरा हाल है। वह बार-बार बच्चों के भविष्य और उनके पालन-पोषण को लेकर सवाल कर रही हैं। हिरदेश के पिता विनोद शाक्यवार ने कहा कि एक तरफ मौत थी और दूसरी तरफ खाई। सड़क पर एक तरफ गड्ढा खुदा था और दूसरी ओर वाहन आ रहे थे। इसी बीच बेटा बाइक समेत गड्ढे में जा गिरा। उन्होंने डकोर कोतवाली में जल निगम ग्रामीण और नमामि गंगे परियोजना से जुड़े जिम्मेदारों के खिलाफ तहरीर दी है।
सीसी कैमरों से हादसे की स्थिति तलाश रही पुलिस
पुलिस हादसे की वास्तविक वजह पता लगाने के लिए आसपास लगे सीसी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। परिजन भी आसपास के कैमरों की फुटेज तलाश रहे हैं। उनका कहना है कि यदि किसी वाहन की टक्कर से हादसा हुआ है तो इसकी भी पुष्टि होनी चाहिए। डकोर कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक देवेंद्र कुमार ने बताया कि सीसी कैमरों की मदद से घटना की जानकारी जुटाई जा रही है। रात का समय होने के कारण अभी ऐसा साक्ष्य नहीं मिला है, जिससे हादसे की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सके। मौके पर बाइक गड्ढे में और हिरदेश सड़क किनारे मृत मिले थे। पुलिस ने पंचनामा भरकर शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
पांच माह से लीकेज थी पाइपलाइन
ग्रामीणों के अनुसार स्कूल के सामने जल निगम ग्रामीण की पाइपलाइन करीब पांच माह से दो स्थानों पर लीकेज थी। इससे स्कूल परिसर और मैदान में पानी भर जाता था। बच्चों और अभिभावकों को आने-जाने में परेशानी होती थी। कई बार शिकायत के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ। इसके बाद अमर उजाला ने लगातार दो दिन समस्या को प्रमुखता से प्रकाशित किया। खबर के बाद जल निगम ग्रामीण ने जेसीबी से सड़क किनारे दो बड़े गड्ढे खोदकर पाइपलाइन की लीकेज तलाशने का काम शुरू किया। ग्रामीणों का आरोप है कि गड्ढे खोदने के बाद उन्हें तीन दिन तक खुला छोड़ दिया गया। सुरक्षा के लिए न बैरिकेडिंग लगाई गई और न ही कोई संकेतक। गड्ढों की मिट्टी सड़क पर डाल दिए जाने से रात में वाहन चालकों के लिए रास्ता और मुश्किल हो गया था।
ठेकेदार ने वाहन की टक्कर की जताई आशंका
हादसे के बाद जल निगम के ठेकेदार ने ग्रामीणों के आरोपों को नकारते हुए आशंका जताई कि बाइक किसी वाहन की टक्कर के बाद गड्ढे में गिरी होगी। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि गड्ढे के चारों ओर सुरक्षा व्यवस्था की गई होती तो हादसा बच सकता था। घटना की वास्तविक स्थिति पुलिस की जांच और सीसी कैमरों की फुटेज से स्पष्ट होगी।
शिकायतों के बाद भी नहीं सुधरी व्यवस्था
ग्राम प्रधान प्रतिनिधि केके राजपूत ने बताया कि पाइपलाइन लीकेज की समस्या को लेकर कई बार विभागीय अधिकारियों से शिकायत की गई थी। स्कूल परिसर में पानी भरने से बच्चों को परेशानी होती थी। विभाग ने समस्या दूर करने के लिए गड्ढे तो खोद दिए, लेकिन सुरक्षा इंतजाम नहीं किए। उन्होंने हादसे की जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की मांग की। जेई ने लोगों को जान जोखिम में डालने के लिए गड्ढा खोद दिया और यहां से निकल लिए।
स्कूल और स्वास्थ्य केंद्र के सामने खतरा
स्कूल के सामने खुले गड्ढों से बच्चों और शिक्षकों में भी डर बना हुआ है। इसी मार्ग पर स्वास्थ्य केंद्र भी है, जहां मरीजों और गर्भवती महिलाओं का आना-जाना रहता है। ग्रामीण दिवाकर राजपूत, राहुल राजपूत, प्यारे लाल और शिवशंकर ने कहा कि गड्ढों के आसपास तत्काल बैरिकेडिंग कराकर संकेतक लगाए जाएं, ताकि आगे कोई हादसा न हो। ग्रामीणों ने हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई और खुले गड्ढों को तत्काल बंद कराने की मांग की है।
वर्जन
खोदा गया गड्ढा इतने दिन तक क्यों नहीं भरवाया गया, इसकी जांच करवाई जाएगी। अगर जांच में गड़बड़ी मिलती है, तो कार्रवाई की जाएगी। जल निगम के अधिकारियों से भी बात की जाएगी। – केके सिंह, सीडीओ
युवक की मौत गड्ढे की वजह से नहीं हुई है, वह ट्रक हादसे का शिकार हुआ है। कुछ लोगों ने गलत जानकारी दी है।
– लवकुश राजपूत, प्रोजेक्ट मैनेजर, जलनिगम
