इटावा। इंडिया मार्ट पर सस्ते अनाज और बीज का विज्ञापन देकर व्यापारियों को ठगने वाला साइबर गिरोह का नेटवर्क देश के विभिन्न राज्यों से मिलीं शिकायतों के तार जोड़ने पर सामने आया। साइबर पुलिस ने एनसीआरपी और जेएमआईएस पोर्टल पर दर्ज शिकायतों की पड़ताल की। जांच में एक ही बैंक खाते और मोबाइल नंबर से जुड़े कई मामले सामने आए। आरोपियों से जुड़े 22 बैंक खातों में चार से पांच करोड़ रुपये तक के लेनदेन का पता चला है।
साइबर थाने के निरीक्षक राघवेंद्र तिवारी की प्राथमिकी के अनुसार, एनसीआरपी पोर्टल पर शिकायतों की जांच चल रही थी। इस दौरान पंजाब एंड सिंध बैंक में एग्रो कनेक्ट इंडस्ट्रीज के नाम से एक खाता सामने आया। यह खाता आमिर सुहैल के नाम से जुड़ा था, लेकिन मोबाइल नंबर प्रतीक सक्सेना के नाम पर पंजीकृत पाया गया। पुलिस ने इस खाते और मोबाइल नंबर से जुड़े लेनदेन और शिकायतों की जांच शुरू की। इस खाते के खिलाफ अलग-अलग समय पर ऑनलाइन ठगी की शिकायतें दर्ज हुई थीं। एक शिकायत में 23 दिसंबर 2025 को सरसों का बीज खरीदने के नाम पर 46,620 रुपये एनईएफटी से जमा कराए गए। दूसरी शिकायत में 8 अक्तूबर 2025 को इसी खाते में 90 हजार रुपये यूपीआई से भेजे गए थे। दोनों मामलों में व्यापारियों ने माल उपलब्ध न कराने का आरोप लगाया था। फरार आमिर सुहैल को प्रतीक ने अपना साझेदार बताया है। गिरफ्तार आकाश उसका चालक था, जबकि विकास और सर्वेश दुकान पर काम करते थे। पुलिस इनकी भूमिका की जांच कर रही है कि वे केवल दुकान संचालन तक सीमित थे या ठगी में सक्रिय थे। पुलिस 22 बैंक खातों के लेनदेन का मिलान कर रही है। इससे यह पता लगाया जा रहा है कि किन राज्यों के व्यापारियों से रकम मंगाई गई। साथ ही, कितनी रकम किस माध्यम से निकाली गई, इसकी भी जांच जारी है। एनसीआरपी और अन्य राज्यों की शिकायतों का आरोपियों के मोबाइल नंबर, बैंक खाते और फर्मों से मिलान हो रहा है।
पहले विज्ञापन, फिर फोन और एडवांस रकम
पुलिस जांच में ठगी का तरीका लगभग एक जैसा पाया गया। गिरोह इंडिया मार्ट जैसे ऑनलाइन मंच पर सस्ते अनाज और बीज के विज्ञापन देता था। व्यापारियों के संपर्क करने पर पहले एक महिला फोन करती थी। वह खुद को संबंधित कंपनी या फर्म से जुड़ा बताकर भरोसा दिलाती थी। इसके बाद व्यापारी को कंपनी के प्रतिनिधि या मालिक से बात कराई जाती थी। सौदा तय होने पर अग्रिम रकम क्यूआर कोड, यूपीआई या बैंक खाते में जमा कराई जाती थी। रकम मिलने के बाद व्यापारी को माल परिवहन के माध्यम से भेजने की जानकारी दी जाती थी। भरोसा बनाए रखने के लिए फर्जी बिल्टी या अन्य दस्तावेज की फोटो भी भेजी जाती थी। माल तय समय पर न पहुंचने पर व्यापारी संपर्क करता था। इसके बाद कभी अतिरिक्त रकम जमा करने को कहा जाता तो कभी कोई दूसरा बहाना बनाया जाता। रकम वापस मांगने पर फोन बंद कर दिया जाता या धमकी देने का आरोप भी शिकायतों में सामने आया।
बिहार के व्यापारी को फर्जी बिल्टी भेजी
बिहार के रोहतास जिले के सकला बाजार निवासी बीज कारोबारी केदार साह भी इस गिरोह का शिकार हुए। केदार ने इंडिया मार्ट पर एग्रो टेक कंपनी का विज्ञापन देखा और इटावा में प्रतीक सक्सेना से मिले। प्रतीक ने खुद को फर्म का मालिक बताया और सरसों के बीज का सौदा तय किया। केदार ने क्यूआर कोड और बाद में बैंक खाते में अग्रिम रकम भेज दी। उन्हें बिल्टी की फोटो भेजकर माल परिवहन होने की जानकारी दी गई, पर बीज नहीं पहुंच। बिल्टी पर दिए नंबर और पते पर संपर्क नहीं हुआ
पहचान छिपाकर करता था ठगी
पुलिस जांच में सामने आया कि साइबर ठगी के गिरोह का सरगना प्रतीक सक्सेना अपनी वास्तविक पहचान छिपाता था। वह व्यापारियों के सामने खुद को राजीव कुमार बताता था। सौदा तय करते समय वह फर्जी आधार कार्ड का भी इस्तेमाल करता था, ताकि उसकी असली पहचान सामने न आ सके। प्रतीक अपनी पत्नी के साथ मिलकर करीब तीन साल से इस तरह की गतिविधियों में शामिल था। पुलिस पूछताछ में प्रतीक ने बताया कि उसने 2023 में एग्रो कनेक्ट इंडस्ट्रीज के नाम से फर्म का पंजीकरण कराया था। इसके बाद फर्म के नाम से संयुक्त बैंक खाता खोला गया। इसी खाते में देशभर के अलग-अलग व्यापारियों से अनाज और बीज की खरीद के नाम पर रकम मंगाई जाती थी। रकम खाते में पहुंचने के बाद उसे चेक, एटीएम और अन्य माध्यमों से निकाल लिया जाता था। पुलिस अब फर्जी दस्तावेज तैयार कराने और उनका इस्तेमाल करने में शामिल अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाल रही है।
बढ़ सकता ठगी का आंकड़ा
अभी तक एनसीआरपी पर मिली करीब 25 शिकायतों में लगभग 45 लाख रुपये की ठगी सामने आई है। पुलिस की शुरुआती जांच में आरोपियों से जुड़े 22 बैंक खातों में चार से पांच करोड़ रुपये तक के लेनदेन का पता चला है। पुलिस अब फरार आमिर सुहैल समेत अन्य संभावित आरोपियों की तलाश में दबिश दे रही है। आरोपियों के मोबाइल फोन, बैंक खातों, डिजिटल भुगतान और दस्तावेज की जांच की जा रही है। दूसरे राज्यों से मिली शिकायतों का भी मिलान किया जा रहा है, जिससे ठगी का आंकड़ा बढ़ने की संभावना है।
वर्जन
एसएसपी बृजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि आरोपियों से जुड़े कारोबार और फर्मों की भी जांच कराई जाएगी। फर्मों के जीएसटी पंजीकरण और रिटर्न की जानकारी जुटाकर ठगी के लेनदेन का पता लगाया जाएगा। आरोपियों के अन्य आपराधिक मामलों और गतिविधियों की भी जानकारी जुटाई जा रही है। साक्ष्य मिलने पर गिरोह के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई कराई जाएगी। इस मामले में आठ नामजद और नौ अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।
