इटावा/चकरनगर। क्षेत्र के किसान साधन सहकारी समितियों पर खाद की किल्लत से जूझ रहे हैं। खरीफ के बाद अब रबी फसलों की बोआई के लिए डीएपी का संकट गहरा गया है। किसान आरोप लगाते हैं कि समितियों पर पर्याप्त खाद नहीं पहुंच रही है।

प्रशासन हालांकि पर्याप्त खाद उपलब्ध होने का दावा कर रहा है। ऐसे में जरूरतमंद किसान निजी दुकानों से महंगे दामों पर खाद खरीदने को मजबूर हैं। सिंड़ौस, सहसों, कुंदौल और गोहानी समितियां करीब 35 वर्ष बाद दोबारा शुरू हुई थीं। किसानों का कहना है कि एक साल बाद भी समितियों पर नियमित खाद नहीं मिल रही है। खाद आने पर भी किसानों को केवल तीन से चार बोरी दी जा रही है। उन्हें एक फसल के लिए करीब 10 बोरी खाद की आवश्यकता होती है। निजी दुकानों पर यूरिया 350 रुपये और डीएपी 1600 रुपये बोरी तक में मिल रही है। किराया और अन्य खर्च जोड़ने पर खाद की लागत और बढ़ जाती है। फार्म रजिस्ट्री और अंश न बनने के कारण कई किसान समितियों से खाद नहीं ले पा रहे हैं। किसानों ने प्रशासन से समितियों पर पर्याप्त यूरिया और डीएपी उपलब्ध कराने की मांग की है। उन्होंने अंश और फार्म रजिस्ट्री की प्रक्रिया सरल करने की भी अपील की है।

सहसों निवासी अपरवल सिंह गुर्जर ने बताया कि सहसों समिति चालू होने पर अधिकारियों ने खूब वाहवाही लूटी, लेकिन अब तक केवल एक बार खाद आई है। अब अधिकारी समिति पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।

महाराजपुरा निवासी अतवल सिंह ने आरोप लगाया कि निजी दुकानदार किसानों से अधिक कीमत वसूल रहे हैं। यूरिया 350 और डीएपी की बोरी 1600 रुपये में मिल रही है। किराया और कागजों का खर्च जोड़ने पर यूरिया करीब 420 रुपये की पड़ रही है।

वर्जन

यदि निजी दुकानदार निर्धारित रेट से ज्यादा कीमत पर खाद बेच रहे हैं तो इसकी जांच कराई जाएगी। किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराने के लिए एआर कोऑपरेटिव से बात कर समस्या का समाधान कराया जाएगा। – रोहित कुमार मौर्य, एसडीएम चकरनगर



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