इटावा। सरकारी धान खरीद की शुरुआत ही अव्यवस्थाओं और बेरुखी के बीच हुई। सोमवार को पहले दिन कुछ केंद्रों को छोड़कर अधिकांश सरकारी में बैनर और तौल के कांटे आदि की व्यवस्था नहीं थी। किसानों के न पहुंचने से सरकारी केंद्रों पर सन्नाटा पसरा रहा। वहीं दूसरी ओर मंडियों में निजी आढ़तियों की दुकानों पर धान की ढेरियां लगी रहीं और तौल होती रही।
जनपद में इस बार धान खरीद के लिए कुल 38 केंद्र बनाए गए हैं। इनमें इटावा नवीन मंडी के आठ, बसरेहर के दो, दतावली, बरालोकपुर, कंधेशी पचार और कुंवरा के एक-एक, ताखा व हैवरा के दो-दो तथा चकवा बुजुर्ग, नगला मठिया, साम्हों, उमरसेंडा, रजमऊ और लटूपुर के एक-एक केंद्र शामिल हैं। जसवंतनगर मंडी में 10 केंद्र बनाए गए हैं।
एक नवंबर से खरीद शुरू होनी थी, लेकिन रविवार होने से सोमवार से खरीद शुरू की गई। इस बार जिले में 66,196 हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की रोपाई हुई है। इसमें 48,200 हेक्टेयर में बासमती, 13,600 हेक्टेयर में हाइब्रिड यानी संकर और 4,396 हेक्टेयर में अन्य किस्मों का धान शामिल है।
सरकारी केंद्रों पर हाइब्रिड या मोटे धान की ही खरीद होती है, जबकि बासमती धान की खरीद नहीं की जाती। उधर, जिले की तीनों प्रमुख धान मंडियों में बीते एक महीने से धान की अच्छी आवक बनी हुई है।
नवीन मंडी में बैनर तक नहीं, कर्मचारी गपशप में रहे व्यस्त
इटावा। नवीन मंडी के आठों सरकारी क्रय केंद्रों पर पहले दिन बैनर तक नहीं लगाए गए थे। हालांकि बारदाना समेत अन्य जरूरी व्यवस्थाएं दुरुस्त थीं। बाजरे का भी केंद्र होने के कारण धान की खरीद के बजाय बाजरे की तौल होती नजर आई। परिसर में अधिकांश जगह खाली पड़ी थी और कर्मचारी गपशप करते दिखाई दिए। दोपहर तक यहां धान बेचने के लिए एक भी किसान नहीं पहुंचा। (संवाद)
केस-दो
भरथना में चारों केंद्र सूने, आढ़तों पर तौल
भरथना। नवीन कृषि उत्पादन मंडी समिति परिसर में खाद्य एवं रसद विभाग के चारों धान खरीद केंद्रों पर पहले दिन सन्नाटा रहा। किसानों के बैठने के लिए बेंच और पीने के पानी के लिए दो कैंपर रखे गए थे। तीसरे और चौथे केंद्र के प्रभारी राजेश कुमार ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक कांटा, बारदाना समेत खरीद के सभी जरूरी संसाधन उपलब्ध हैं। किसान के पहुंचने पर खरीद शुरू कर दी जाएगी। (संवाद)
केस-तीन
जसवंतनगर में 10 केंद्र, फिर भी कांटे नहीं लगे
जसवंतनगर। नवीन मंडी में एक से आठ नवंबर तक के केंद्रों के अलावा क्रय-विक्रय समिति और सहकारी संघ के केंद्र मिलाकर कुल 10 क्रय केंद्र बनाए गए हैं। इसके बावजूद पहले दिन किसी भी केंद्र पर किसान धान बेचने नहीं पहुंचे। हैरानी की बात यह रही कि केंद्रों पर तौल के कांटे तक नहीं लगाए गए थे। दूसरी ओर निजी आढ़तों पर धान की खरीद जारी रही। (संवाद)
पहले दिन किसी भी सरकारी धान खरीद केंद्र पर धान की आवक नहीं हुई है। सभी केंद्रों पर व्यवस्थाएं दुरुस्त हैं। शहर की नवीन मंडी में बंदरों की वजह से बैनर अंदर लगवाए गए हैं। शाम को केंद्रों का निरीक्षण भी किया था संभावना है कि एक-दो दिन में सरकारी क्रय केंद्रों पर धान की आवक शुरू हो जाएगी।
– उदित नारायण सिंह, जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी

फोटो 15: शहर की नवीन मंडी के धान क्रय केंद्र पर होती बाजरे की खरीद, बैनर भी नहीं लगा। संवाद

फोटो 15: शहर की नवीन मंडी के धान क्रय केंद्र पर होती बाजरे की खरीद, बैनर भी नहीं लगा। संवाद

