इटावा। जिले में गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर सामने आई रिपोर्ट चिंताजनक है। बीते दो माह में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव-गांव अभियान चलाकर 6,896 गर्भवती महिलाओं की जांच की। इनमें 1312 महिलाएं हाई रिस्क प्रेगनेंसी से पीड़ित मिलीं हैं। यानि हर पांचवीं गर्भवती जोखिम की श्रेणी में हैं।
शासन के निर्देश पर गर्भवती महिलाओं का स्वास्थ्य परीक्षण और संस्थागत प्रसव कराने पर जोर है। आशा, एएनएम व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को गर्भवती महिलाओं को चिह्नित करने के निर्देश दिए गए थे। सबसे अधिक बसरेहर ब्लॉक में 412 गर्भवती महिलाएं हाई रिस्क से पीड़ित मिली हैं। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि महिलाओं की निगरानी की जा रही है। 35 पीएचसी और नौ सीएचसी में सिर्फ जसवंतनगर में ही महिला रोग विशेषज्ञ की तैनाती है। ऐसे में दिक्कत बढ़ने पर महिलाओं को महिला जिला अस्पताल और आयुर्विज्ञान विवि की दौड़ लगानी पड़ती है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से हर माह में दो बार एचआरपी डे मनाया जाता है। इस दिन गर्भवतियों की जांच की जाती है। हर केंद्र पर औसतन 25 से 30 गर्भवती जांच के लिए आती हैं। कई महिलाएं खून की कमी या अन्य कारणों से हाई रिस्क श्रेणी में हैं।
महिला महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि हाई रिस्क प्रेग्नेंसी में समय पर जांच और सही इलाज न मिले तो मां और बच्चे दोनों की जान को खतरा हो सकता है। उन्होंने बताया कि पेट में तेज दर्द, लगातार सिरदर्द, धुंधली दृष्टि, पैरों या चेहरे पर अत्यधिक सूजन तथा शिशु की हलचल कम होना हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के लक्षण हैं। इसके कारणों में मां की उम्र 18 वर्ष से कम या 35 वर्ष से अधिक होना, हाई बीपी, डायबिटीज, मोटापा या पुरानी बीमारियां शामिल हैं। ऐसे में नियमित जांच, विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह और अतिरिक्त सावधानी की जरूरत होती है।
हाई-रिस्क प्रेगनेंसी में मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य की विशेष देखभाल जरूरी होती है। जटिलता से बचने के लिए डॉक्टर की ओर से तय की गई सभी जांचों को समय से कराएं और समय पर परामर्श लेते रहें। आयरन, फोलिक एसिड या अन्य विशेष दवाएं समय पर लें। बिना डॉक्टर की सलाह के कोई दवा न खाएं। हरी पत्तेदार सब्जियां, फल, दूध, और प्रोटीन युक्त भोजन करें। पर्याप्त मात्रा में पानी और तरल पदार्थ पीयें।
हाई-रिस्क प्रेगनेंसी से घबराने की नहीं, बल्कि सही समय पर सही देखभाल की जरूरत होती है। यदि किसी महिला में डायबिटीज, हाइपरटेंशन, खून की कमी (एनीमिया) या पहले से कोई स्वास्थ्य समस्या है, तो उसे विशेष निगरानी में रखना अनिवार्य हो जाता है। अत्यधिक दर्द, ब्लीडिंग, या बच्चे की हलचल कम होने पर तुरंत नजदीकी अस्पताल से संपर्क करना चाहिए। -डॉ. अनिल कुमार, सीएमएस महिला जिला अस्पताल
