चकरनगर। मध्यप्रदेश और राजस्थान में लगातार बारिश के बाद चंबल नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। काली सिंध पर बने नवनेरा बैराज से 4.15 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। यह पानी गुरुवार, 13 अगस्त को सुबह जिले में चंबल नदी तक पहुंच गया।
बुधवार, 12 अगस्त को चंबल का जलस्तर 107.37 मीटर था। गुरुवार, 13 अगस्त की शाम छह बजे तक यह बढ़कर 115.41 मीटर पर पहुंच गया। 24 घंटे में जलस्तर में 8.04 मीटर की वृद्धि दर्ज की गई है। चंबल का चेतावनी निशान 119.80 मीटर पर है। वर्तमान में जलस्तर चेतावनी निशान से 4.39 मीटर नीचे है। नदी किनारे बसे सहसों, नदा, पालीघार सहित 40 गांव के ग्रामीण बाढ़ की आशंका से चिंतित हैं। प्रशासन ने बढ़ते जलस्तर को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। एसडीएम चकरनगर रोहित कुमार मौर्य ने संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लिया।
एसडीएम रोहित कुमार मौर्य ने गुरुवार, 13 अगस्त की शाम सहसों और बंसरी चंबल पुल का निरीक्षण किया। उन्होंने गढ़ाकासदा, भरेह, हरौली बहादुर, चकरपुरा, अमदापुर और महुआ सूडा गांवों का भी दौरा किया। ग्रामीणों को घबराने की बजाय सतर्क रहने की सलाह दी गई। उन्होंने बताया कि प्रशासन बाढ़ से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। लेखपालों को गांवों की स्थिति जानने के लिए तैनात किया गया है।
चकरनगर क्षेत्र में कई बाढ़ चौकियां स्थापित की गई हैं। इनमें प्राथमिक विद्यालय कंधेशीघार और गया प्रसाद वर्मा महाविद्यालय डिभोली शामिल हैं। तहसीलदार कार्यालय को रिपोर्टिंग सेंटर बनाया गया है। कंधेसीघार, महुआ सूडा, अंदावा नीमाडांडा, हरौली और भरेह में नावें भी लगाई गई हैं। एसडीएम रोहित कुमार मौर्य ने बताया कि चंबल का बहाव तेज है, लेकिन शाम को स्थिर होने की जानकारी मिली है।
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बढ़पुरा क्षेत्र के गांवों में भी सहमे रहे ग्रामीण
उदी। चंबल नदी का जलस्तर बढ़ने से बढ़पुरा क्षेत्र के गांवों में भी लोग दहशत में हैं। चंबल नदी किनारे बसे पछायगांव, बसवारा, खेड़ा अजब सिंह समेत आसपास के गांवों के लोग दिन भर चंबल नदी पर नजर बनाए रहे जिससे ज्यादा पानी बढ़ने पर वह परिवार को सुरक्षित स्थान पर ले जा सकें। चंबल में तेजी से बढ़ते पानी पर प्रशासन भी नजर बनाए हुए है। ग्रामीणों का कहना है कि चंबल में इसी तरह पानी बढ़ता रहा तो निचले इलाकों में मुश्किल बढ़ सकती है। नदी किनारे रहने वाले लोगों में संभावित बाढ़ को लेकर चिंता बनी हुई है।
