फतेहपुर। मधुमेह अब केवल बुजुर्गों की बीमारी नहीं रह गई है। बदलती जीवनशैली, अनियमित खानपान और शारीरिक गतिविधियों में कमी के चलते युवा भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं।

जिले में हर महीने औसतन 85 नए मधुमेह रोगी सामने आ रहे हैं। चिकित्सकों के मुताबिक, युवा शुरुआती लक्षणों को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। समय पर जांच और उपचार न मिलने से बीमारी गंभीर रूप ले सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार फास्ट फूड का अधिक सेवन, मोटापा, तनाव, अनियमित दिनचर्या और शारीरिक मेहनत की कमी मधुमेह के प्रमुख जोखिम कारक हैं। बार-बार प्यास लगना, पेशाब आना, अधिक भूख लगना, बिना वजह वजन घटना, थकान और धुंधला दिखाई देना इसके प्रमुख लक्षण हैं। ऐसे लक्षण दिखने पर ब्लड शुगर और एचबीए1सी की जांच करानी चाहिए।

सीएमओ डॉ. यूबी सिंह ने बताया कि लंबे समय तक ब्लड शुगर नियंत्रित न रहने से किडनी, आंखों, हृदय और नसों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। कई बार मरीजों को बीमारी का पता तब चलता है, जब शरीर में दूसरी समस्याएं शुरू हो जाती हैं। ऐसे में नियमित जांच और चिकित्सकीय सलाह बेहद जरूरी है।

सीएमएस डॉ. राजेश कुमार शर्मा ने बताया कि मधुमेह से बचाव के लिए युवाओं को अपनी जीवनशैली में सुधार करना चाहिए। फास्ट फूड, मीठे पेय पदार्थों और तली-भुनी चीजों का सेवन कम करना चाहिए। नियमित व्यायाम, पैदल चलना, संतुलित भोजन और पर्याप्त नींद को दिनचर्या का हिस्सा बनाना जरूरी है।



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