आपकी सांसों और पीने के पानी में जिन्होंने जहर घोला, उनके खिलाफ ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) अथॉरिटी और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) जुर्माना ही नहीं वसूल पाया। हैरतअंगेज पहलू यह है कि इनमें से ज्यादातर सरकारी विभाग हैं, जिन पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति लगाई गई, लेकिन उन विभागों ने जुर्माना जमा ही नहीं किया। इसकी रिपोर्ट नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में दाखिल की गई है।
शहर की हवा में जहर घोलने वालों पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति के नाम पर 11.57 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया, लेकिन इनमें से सरकारी विभागों ने एक रुपया भी जमा नहीं किया। 36 इकाइयां ऐसी हैं, जिन पर हवा और पानी में प्रदूषण फैलाने के नाम पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति लगाई गई। जल निगम, रेलवे, मेट्रो कॉरपोरेशन, यमुना एक्शन प्लान, जल निगम की गंगाजल इकाई आदि ऐसे विभाग हैं, जिन्होंने टीटीजेड अथाॅरिटी और यूपीपीसीबी के लगाए जुर्माने पर ध्यान नहीं दिया। निजी इकाइयों पर जो जुर्माने लगाए गए, वह तत्काल वसूल लिए गए, लेकिन सरकारी विभागों को छूट दी गई। यह ब्योरा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल को सौंपा गया है।
इन सरकारी विभागों ने जमा न किया जुर्माना
विभाग जुर्माना
उत्तर मध्य रेलवे 71.50 लाख
जल निगम यमुना एक्शन प्लान 31.12 लाख
जल निगम गंगाजल इकाई 37.50 लाख
यूपी मेट्रो रेल कॉरपोरेशन 37.50 लाख
जल निगम निर्माण इकाई 10.25 लाख
जलनिगम नगरीय 6 लाख
जल निगम नगरीय निर्माण 9.25 लाख
जल निगम यमुना एक्शन यूनिट 15.75 लाख
(धनराशि रुपये में)
नालंदा टाउन ने जमा नहीं कराया जुर्माना
कॉलोनी का सीवर खुले मैदान में डालने पर जनहित याचिका में नालंदा टाउन पर 2.13 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया था, लेकिन यह भी अब तक वसूला नहीं गया है। एनजीटी में दाखिल की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि लखनपुर में विमल कार पर 1.75 लाख रुपये, बमरौली कटारा में आरपी इन्फ्रा के रेडिमिक्स प्लांट पर 3.75 लाख रुपये, सदरवन के 36 एमएलडी एसटीपी पर लगाया गया 5.25 लाख रुपये का जुर्माना वसूला नहीं जा सका है। प्रदूषण फैलाने वाली 36 इकाइयों में से केवल 11 निजी इकाइयों ने ही जुर्माना जमा किया। बाकी सरकारी विभागों से वसूली नहीं की गई।
अवमानना का मामला
प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों के लिए दो मानक क्यों रखे गए। निजी क्षेत्र से तुरंत वसूली, पर सरकारी विभागों से सालों तक वसूली नहीं किया जाना चिंताजनक है। एनजीटी के आदेश के बाद भी वसूली न करने का मामला अवमानना है, इसे उठाया जाएगा। -डॉ. शरद गुप्ता, पर्यावरणविद
कार्रवाई होनी चाहिए
जिन्होंने हवा और पानी में जहर घोला है, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। एनजीटी में अवमानना का मामला सामने लाया जाएगा। सरकारी विभाग किसी नियम से ऊपर नहीं है। -सुमित रमन, याचिकाकर्ता