नाक मोटी या टेढ़ी है और खर्राटे भी आते हैं। रात में सांस लेने में परेशानी होती है तो बिना टांका या चीरफाड़ के दूरबीन विधि से तीन घंटे में ये परेशानी पूरी तरह से ठीक हो जाएगी। एसएन मेडिकल कॉलेज के ईएनटी रोग विभाग में सेप्टो-राइनोप्लास्टी पर आयोजित कार्यशाला में इस विधि से सर्जरी कर प्रशिक्षु चिकित्सकों को प्रशिक्षण भी दिया गया।

दिल्ली के डॉ. अर्पित अग्रवाल ने बताया कि खर्राटे आना, नाक बंद होना और रात में सांस लेने में परेशानी की वजह नाक की बनावट है। करीब 20 फीसदी मरीजों में ये जन्मजात और 80 फीसदी में चोट की वजह से ये परेशानी बनती है। ऐसी स्थिति में सेप्टो-राइनोप्लास्टी से ये परेशानी ठीक की जाती है। दूरबीन विधि से नाक के अंदरूनी हिस्से की हड्डी को सीधा करते हैं, जिससे सांस लेने का रास्ता साफ हो जाता है। नाक भी सीधी हो जाती है। इसमें चीरफाड़ करने की जरूरत नहीं पड़ती है। सर्जरी में ढाई से तीन घंटे का समय लगता है।

देहरादून के डॉ. शरद हरनौत ने बताया कि कई मरीजों के नाक की हड्डी टेढ़ी होने से सांस लेने का रास्ता बाधित हो जाता है और रात में नाक बंद हो जाती है। मुंह से सांस लेने पर गला सूखने लगता है। नाक की बनावट में सुधार करवाने के लिए भी सर्जरी कराई जा रही है। इसमें अधिकांश युवा हैं। नाक से जुड़ी सर्जरी में करीब 15 फीसदी नाक को सुंदर बनाने के लिए करा रहे हैं। बड़े शहरों में इसकी संख्या अधिक है।

विभागाध्यक्ष डॉ. रीतू गुप्ता ने बताया कि दो सर्जरी का सजीव प्रसारण भी किया गया, जिससे प्रशिक्षु चिकित्सकों को लाभ मिला। कार्यशाला में डॉ. अखिल प्रताप सिंह, डॉ. सलोनी सिंह, डॉ. सौम्यता नीरज, डॉ. बृजेंद्र सिंह बघेल, डॉ. वीपी गुप्ता, डॉ. विक्रांत सिंघल, डॉ. एके मिश्रा, डॉ. प्रशांत जैन, डॉ. योगिता द्विवेदी, डॉ. अमृता गुप्ता, डॉ. दीपिका चौबे आदि मौजूद रहे।

बिना परामर्श के ड्रॉप से नाक में संक्रमण

ईएनटी रोग विशेषज्ञ डॉ. रजत कपूर ने बताया कि कई बार मरीज बिना परामर्श के ही नाक बंद होने पर ड्रॉप डाल लेते हैं। इससे संक्रमण का खतरा होता है। नाक के अंदर की त्वचा बेहद संवेदनशील होती है, जिससे उसकी प्राकृतिक नमी कम होती है। इससे खुजली और अन्य परेशानियां होने लगती हैं। नाक की एलर्जी भी बन सकती है।

विकृत नाक की एसएन में निशुल्क सर्जरी

ईएनटी रोग विभागाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि एसएन में जन्मजात या चोट से विकृत हुई नाक की सर्जरी की जा रही है। कुछ मामलों में अंदरूनी हिस्से में मामूली कट लगाया जाता है। दूरबीन विधि से मरीज जल्द ठीक हो जाता है। एसएन में निशुल्क सर्जरी हो रही है। निजी अस्पतालों में एक लाख से तीन लाख रुपये तक खर्च आता है।

 



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